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संयुक्त परिवार विघटन की मूल जड़ हैं स्वार्थपरता : डॉ. गोकुलेश्वरकुमार द्विवेदी


नागपुर/पुणे। संयुक्त परिवार में प्रेम से बैठकर खाना खाना, खेल खेलना, महिलाओं के सभी काम निर्धारित होते थे। परिणामत: सभी काम अच्छे से हो जाते थे। संयुक्त रुप मे व्यय तथा आवश्यकता मे कमी रहती थी। परंतु संयुक्त परिवार स्वार्थ परता की भावना ने बिखराव लाया। 

ये विचार विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश की ओर से संयुक्त परिवार का विघटन : कारण और निवारण" विषय पर आयोजित आभासी गोष्ठी में संस्थान के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने अध्यक्षीय समापन मे कहे।

प्रास्ताविक मे डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र, अध्यक्ष विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज ने कहा कि संयुक्त परिवार के विघटन का प्रमुख कारण वर्तमान में पाश्चात्य प्रभाव है। संयुक्त परिवार विघटन के तीन कारण हैं-शिक्षितों का परिवार से अलग होना, नौकरी के कारण परिवार से पृथक हो जाना और तीसरा आपसी सामंजस्य की कमी।संस्कार तथा त्याग व समर्पण की भावना का अभाव संयुक्त परिवार को खंडित कर देते हैं।

विशिष्ट वक्ता डॉ. विश्वनाथ कश्यप, कोरबा, छत्तीसगढ़ ने परिवार के विघटन का कारण स्वार्थपरता, निजी संपत्ति, धन जुटाने की लालसा, सेवा भाव की कमी, परिवार के प्रति सद्भावना में कमी,आधुनिक जीवन के प्रति मोह, संस्कारों की कमी आदि सभी को संयुक्त परिवार के विघटन का कारण बताये है।

मुख्य अतिथि श्रीओमप्रकाश त्रिपाठी, सदस्य किशोर न्यायालय, सोनभद्र, उत्तरप्रदेश ने कहा कि संयुक्त परिवार के विघटन के कारण- भौतिक विकास,  भारतीय मानसिकता का आधुनिकता की ओर झुकाव, स्नेह और संतुलन की कमी आदि है।
वक्ता डॉ. सुधा चाकरे, शासकीय महाविद्यालय, नलखेड़ा, मध्य प्रदेश ने कहा कि संयुक्त परिवार  आर्थिक और पारिवारिक वातावरण, स्वस्थ पालन पोषण से परिपूर्ण रहता था।

वक्ता डॉ. चंद्रशेखर सिंह, मुंगेली, बिलासपुर, रायपुर ने कहा कि गलत फहमियां, स्वतंत्रता पसंद करना, पाश्चात्य संस्कृति के प्रति लगाव, बेरोजगारी, भारतीय समाज व्यक्तिवाद की ओर बढ़ना आदि कारण संयुक्त परिवार को बिखरा दे रहे हैं।

कार्यक्रम का प्रारंभ श्रीमती रश्मि लहर की मां सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत उद्बोधन डॉ रश्मि चौबे ने किया। कार्यक्रम का सुंदर एवं सफल संचालन डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, हिंदी सांसद, छत्तीसगढ़ प्रभारी ने किया एवं आभार व्यक्त युवा प्रभारी श्री लक्ष्मीकांत वैष्णव ने किया।

इस आभासी संगोष्ठी में महाराष्ट्र से डॉ. भरत शेणकर, जहीरूद्दीन पठान, श्रीमती रोहिणी डावरे, डॉ. सरस्वती वर्मा, डॉ. नजमा मलिक सहित अन्य साहित्यकार, विद्वान उपस्थित रहे।
साहित्य 1389929950097876221
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