जन मानस प्रभु राम के चरित्र से निरंतर प्रभावित होता रहेगा : डॉ. सुनील देवधर
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नागपुर/पुणे। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज के तत्वावधान में आभासीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। जिसका विषय 'संस्कृत में राम कथा' पर डॉ. सुनील देवधर सहायक निदेशक, (कार्यक्रम ) आकाशवाणी, पुणे महाराष्ट्र, मुख्य अतिथि के रूप में अपना मंतव्य दे रहे थे। उन्होंने कहा कि, हमारे राम मंदिर देवालय में नहीं हैं। जन जीवन में हैं, लोग चर्चा में हैं, नाटकों में हैं, संवादों में हैं और वो हमारे साथ हैं। हम अपने देवताओं को अपने साथ रखते हैं। यह हमारी संस्कृति है।
भाष्य के 13 नाटक जिसमें दो नाटक प्रतिमा और अभिषेक के प्रसंगों का बखान किया और तुलसी के राम, केशव के राम एवं राम की राजनीति, नारी के प्रति सोच, न्याय व्यवस्था, राज्य शासन आदि के बारे में विचार व्यक्त किए। श्री राम से संबंधित कई दोहों के साथ अंत में उन्होंने लोक भाषा में कहा कि, - एक हते राम, एक हते रामन्ना, जे हते क्षत्रिय, वे हते बामन्ना, विन ने उनकी नार हरी, उन्ने उनकी नाश करी, बात को होगओ बातन्ना, तुलसी लिख गए पोथन्ना।
डॉ. अमिता एल टंडेल, हिंदी विभागाध्यक्ष, प्रोफेसर, आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज, दमन दीप ने कहा-राम शब्द बोलने के साथ ही हमारे रोम रोम में परमात्मा का निवास होता है। उनकी अनुभूति हमारे अंदर अभिव्यक्त होती है। इक्ष्वाकु कुल में जन्मे प्रभु राम बड़ों की आज्ञा का पालन करते हैं। सर्व धर्म का पालन करने वाले हैं। प्राणी मात्र के रक्षक हैं। सर्वगुण संपन्न हैं। वर्णाश्रम का पालन पालन करते हैं। वेद वेदांग के परगामी हैं। धेर्य में हिमालय के समान, पराक्रम में विष्णु के समान, गुण देयता में समुद्र के समान, क्षमा में धरती के समान, सत्य वचन बोलने वाले, सभी में रमे हुए, दान में कुबेर के समान, युद्ध में अग्नि के समान, अच्छे भाई, मातृ पितृ - भक्त आदि उनके चरित्र की विशेषताओं का बखान किया।
डॉ. मीना खरात, सहयोगी प्राध्यापक, श्री मुक्तानंद महाविद्यालय, औरंगाबाद, महाराष्ट्र ने वालमीकी जी का जीवन परिचय दिया। क्रौंच पक्षी की कथा सुनाई और बताया कि किस तरह बाल्मीकि जी कवि बने कहा कि, सदाचारी, संयमी, नीतिवान, आदर्श चरित्र, आदर्श राजा का वर्णन वाल्मीकि ने अपनी रामायण में किया है। इसके पढ़ने से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्राप्त होते हैं। राम के चरित्र की आवश्यकता आज भी हमारे समाज के लिए है। राम एक आदर्श हैं। जीवन के लिए राम प्रतिज्ञा पालन करने को प्रथम धर्म मानते हैं।
अध्यक्षीय भाषण में डॉ.शहावुद्दीन नियाज़ मोहम्मद शेख, संस्थान अध्यक्ष, पुणे, महाराष्ट्र ने कहा कि संस्कृत भारतीय भाषाओं की जननी है। उसे हम देव भाषा कहते हैं। इसका साहित्य भारतीय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है। संस्कृत साहित्य में रामकथा आदर्श तथा अनुकरणीय है। मानव के रूप में राम का चरित्र गढ़ा गया है। आदि रामायण में राम सगुण निर्गुण परम तत्व हैं। पृथ्वी पर कौशलपुरी ही त्रिलोक है। श्रीमद् भागवत की कृष्ण लीला इसमें रामलीला के माध्यम से 18 वें अध्याय में वर्णन है। यह दार्शनिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
कार्यक्रम का उत्तम संचालन डॉ. रश्मि चौबे गाजियाबाद, राष्ट्रीय प्रभारी बाल संसद एवं प्रतिनिधि गाजियाबाद ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत श्रीमती ज्योति तिवारी बाल संसद प्रभारी मध्य प्रदेश की सरस्वती वंदना से हुई। स्वागत भाषण श्रीमती पुष्पा श्रीवास्तव, उत्तर प्रदेश प्रभारी, रायबरेली, उत्तर प्रदेश जी ने कविता सुनाते हुए दिया।
आभार प्रदर्शन डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, छत्तीसगढ़ सांसद, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने दिया और कहा- जिनके मन में राम है। उनके मन में बैकुंठ धाम है।
कार्यक्रम में डॉ. गोकुलेश्वर द्विवेदी, संस्थान सचिव, डॉ. भरत शेणकर, नज़मा मलेक, सीमा वर्मा, सरस्वती वर्मा, डॉ.सुधा सिन्हा आदि अन्य अनेक गणमान्य उपस्थित थे।