अरविंदकुमार रतूड़ी 'समाज रत्न भूषण' सम्मान से सम्मानित
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नागपुर। सक्करदारा चौक युवा समाजसेवी और सामाजिक संगठन किंग कोबरा आर्गेनाइजेशन यूथ फोर्स राष्ट्र निर्माण की और दो कदम, नारी शक्ति एक सम्मान, पशु क्रूरता के ख़िलाफ़ जंग के संस्थापक अध्यक्ष और राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय मानवअधिकार कार्यकर्ता अरविंदकुमार रतूड़ी को उनके विभिन्न जन हितार्थ, देश हितार्थ, प्राणी हितार्थ, निःशुल्क निस्वार्थ लगभग तीस सालों से निरंतर चले आ रहे सामाज कार्यों के लिए, खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य का बाजारीकरण और व्यवसायीकरण रोकना, गौ हत्या, भ्रूण हत्या, घरेलू हिंसा, दहेज प्रथा रोकने, रक्तदान, नेत्रदान, देहदान, वृक्षारोपण आदि कार्य करते हुए इन विषयों पर जनजागृति अभियान चलाने एवं
कोरोना महामारी में एक सच्चा कोरोना योद्धा बनकर मार्च २०२० से लगातार वर्तमान समय २०२२ तक अपनी राष्ट्रीय मानवतावादी सेवा देने, असंख्य ज़रूरतमंद गरीबों को जीवन आवश्यक सामग्री दान करने, परप्रांतिय लोगों को उनके राज्यों में भेजना, कोविड वायरस से बचने हेतु जनजागरण अभियान चलाना और लगभग ३३०० से उपर कोरोना मृतकों का अंतिम संस्कार स्वयं के खर्चे से करने के लिए सुप्रसिद्ध शिक्षण संस्थान सेवादल महाविद्यालय और विदर्भ बुनियादी हाईस्कूल की तरफ से समाज रत्न भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया।
शिक्षण संस्थान के चैयरमेन डॉ. प्राध्यापक संजय शेडे द्वारा यह सम्मान और स्मृति चिन्ह दिया गया और श्री रतूड़ी के वर्षों से निरंतर चले आ रहे मानवतावादी सामाज कार्यो की भूरी भूरी प्रशंसा की। डॉ. संजय शेडे द्वारा की गई सम्मान मिलने पर श्री रतूड़ी द्वारा कहा गया कि यह सम्मान मिलना मेरे और मेरे समाज कार्य के लिए एक अविस्मरणीय गौरवशाली दिन है, नई दिशा और ऊर्जा है और अब समाज, देश के प्रति मेरी ज़िम्मेदारी ज्यादा बढ़ गई है और राष्ट्र धर्म का दायित्व भी बढ़ गया है। यह सिर्फ सम्मान नहीं है बल्कि मेरे लिए प्रेरणा है। आख़री सांसों तक समाज सेवा करने के लिए और हर पल हर कदम मुझे मेरे कर्तव्य निभाने की याद दिलाता रहेगा।
यह सम्मान और स्मृति चिन्ह क्यूंकि सामाजिक कार्य करने में जो सम्मान मिलता है वहीं हमारी सामाजिक जिंदगी की असली दौलत और पूंजी होती है और हमारी पहचान होती है। रतूड़ी ने यह सम्मान अपने सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से हौसला अफजाई करने वाले शुभचिंतकों को समर्पित किया है। सम्मान ग्रहण करते वक्त प्रोफेसर पिसे, मेश्राम, सत्तार खां पठान, जीतू वानखेडे और शिक्षक शिक्षिकाए उपस्थित थे।