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157 वीं जयंती पर पंजाब केसरी लाला लाजपत राय को दी आदरांजली


नागपुर/सावनेर। स्थानीय अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल हेती (सुरला) में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय की 157 जयंती बेहद सादगी किंतु पूरी आस्था से मनायी गई। लालाजी का जन्म 28 जनवरी 1865 में फिरोजपुर पंजाब में हुआ था। बाल्यावस्था से लालाजी लेखन और भाषण में बहुत रूचि लेते थे। वे लाल - बाल - पाल में एक प्रमुख गरम दल के नेता थे। 


इस तिकड़ी ने ब्रिटिश शासन की नाक में दम कर दिया था। विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का आंदोलन छेड़ उन्होंने लाखों युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा दी। कांग्रेस इंडिपेंडेंस पार्टी का गठन किया। गांधीजी के असहयोग आंदोलन में उन्होंने पंजाब का नेतृत्व किया। 

दुनिया उन्हें 'शेर- ए- पंजाब' के नाम से जानने लगी। 3 फरवरी 1928 साइमन कमीशन का पूरे देश ने विरोध किया और 'साइमन गो बैक' के नारे से देश गूंज उठा। अंग्रेजों की लाठियां खा कर भी आंदोलनकारी पीछे नहीं हटे। लाहौर में उमड़ी जनसैलाब का नेतृत्व पंजाब केसरी लाला लाजपत राय कर रहे थे। लाठियों से वे बुरी तरह घायल हुए और उनका निधन हो गया। 

उनकी शहादत व्यर्थ नहीं गई। हिंदुस्तानी उत्तेजित हो उठे। उनकी हत्या का बदला सांडर्स की हत्या से लिया गया। राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह को फांसी की सजा सुनाई गई। उन्होंने 'पंजाब नेशनल बैंक' एवं 'पंजाब केसरी' दैनिक अखबार की पुख्ता नीव रखी। उन्होंने लक्ष्मी बीमा कंपनी की स्थापना की। जलियांवाला बाग हत्याकांड के खिलाफ भी उन्होंने उग्र आंदोलन भी छेड़ा।

अरविंद इंडो पब्लिक स्कूल ने उपस्थित स्टॉफ के साथ उनकी प्रतिमा को पुष्प अर्पित कर अपनी आदरांजली दी, तो विद्यार्थियों ने 157 वी जयंती ऑनलाइन मनाते हुए उनका गुणगान किया। प्राचार्य राजेंद्र मिश्र ने उनकी उन पंक्तियों का जिक्र किया जो उन्होंने साइमन कमीशन के विरोध में प्रदर्शन के दौरान शरीर पर चोट लगने के बाद कही थी। उनके शरीर पर मारी गई लाठियां हिंदुस्तान में ब्रिटिश राज के लिए ताबूत की आखिरी कील साबित होगी।
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