छत्रपति शिवाजी महाराज विश्व के राजा थे : डॉ. सुमा रोडन्नवर
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नागपुर पुणे। छत्रपति शिवाजी महाराज केवल महाराष्ट्र के ही नहीं विश्व के राजा थे। राष्टूभक्ति, त्याग तथा कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में दुनिया उन्हें हमेशा याद करती रहेगीI इस आशय का प्रतिपादन विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान की कर्नाटक प्रभारी डॉ. सुमा टी. रोडन्नवर ने किया।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के तत्वावधान में आयोजीत शिव जयंती उत्सव तथा' राष्ट्रीयता के महानायक: छत्रपति शिवाजी महाराज' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वे मुख्य अतिथि के रूप में उद्बोधन दे रही थी।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उ. प्र. के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख ने गोष्ठी की अध्यक्षता की।
डॉ. सुमा टी. रोडन्नवर ने आगे कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज तथा उनके विचार आज भी प्रासंगिक है। राजा शिवाजी ने कभी भी किसी के सामने सर नहीं झुकाया। वे मुस्लिम धर्म के विरोधक नहीं थे।
गोष्ठी के विशिष्ट वक्ता प्रो. डॉ. अशोक गायकवाड, अहमदनगर, महाराष्ट्र ने कहा कि छत्रपति शिवाजी मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे I मावळ के वीरों का संगठन कर उन्होंने अनेक दुर्गोंपर विजय प्राप्त की। प्रो. गायकवाड ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन का तथा उनकी नीतियों का उल्लेख करते हुए वे किस तरह एक कुशल सेनापति, कुशल राजनीतिज्ञ तथा कट्टर देशभक्त थे इसका सविस्तर विवेचन किया।
गोष्ठी के दुसरे वक्ता प्रो. अनिल काले, नारायणगाँव, महाराष्ट्र ने अपने उद्बोधन में कहा कि, छत्रपति शिवाजी महाराज का नाम सुनते ही एक उर्जा मिलती है। अपनी रयत में उन्होंने आत्मसम्मान का भाव जगाया। वे रयत के राजा थे। राजा शिवाजी को मैनेजमेंट गुरु के रूप में हम देखते हैं। उनके ध्येयवाद तथा वीरता को कोई भूल नहीं सकता। छत्रपति शिवाजी महाराज के अप्रकाशित जीवन पर लेखन की आवश्यकता है।
विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान के अध्यक्ष डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने अपने अध्यक्षीय समापन में कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज राष्ट्र के महानायक थे। उनके प्रशासन में पारदर्शिता थी । उन्होंने अपने प्रशासन में धर्म के ठेकेदारों को अवसर नहीं दिया। उन्होंने धर्म और राजनीति में समन्वय स्थापित किया। छत्रपति शिवाजी महाराज रयत के राजा थे। उनके समय किया गया जल प्रबंधन आज भी पथप्रदर्शक है। अहमदनगर के सुफी संत शहा शरीफ उर्स का उल्लेख करते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज के दादाजी मालोजीराव कैसे सहिष्णु थे इसका भी उल्लेख उन्होंने किया।
डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर, छ.ग. की सरस्वती वंदना से यह राष्ट्रीय गोष्ठी आरंभ हुई। प्रा. रोहिणी डावरे ने इस गोष्ठी का सुंदर व सफल संचालन किया। आरंभ में संस्थान के महाराष्ट्र प्रभारी प्रा. डॉ. भरत शेणकर ने स्वागत भाषण तथा अतिथियों का परिचय दिया l संस्थान के युवा संसद के अध्यक्ष डॉ. जहरूद्दीन पठान ने उपस्थित सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस अवसर पर विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान के सचिव मा. डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी उपस्थित थे। इस अवसर पर डॉ. सरिता सिन्धी, यवतमाळ, डॉ. मधुकर देशमुख, पुणे, प्रा. मधुकर शेटे, अकोले, प्रा. बबन थोरात, राजूर, डॉ. मंगल ससाणे, बारामती आदि साहित अनेकों की उपस्थिति रही।