नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में शिक्षकों की अहम भूमिका : मुकुल कानिटकर
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नागपुर/यवतमाल। स्थानीय लोकनायक बापूजी अणे महिला महाविद्यालय यवतमाल में IQAC समिति और भारतीय शिक्षण मंडल के संयुक्त तत्वाधान में 'नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षकों की भूमिका' इस विषय पर चर्चा सत्र का आयोजन किया गया था। इस चर्चा सत्र में प्रमुख मार्गदर्शक के रुप में अखिल भारतीय शिक्षण मंडल के संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर थे।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भूतपूर्व विधायक तथा यवतमाल एजुकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष दिवाकरराव पांडे ने की। विशेष अतिथि के रूप में एजुकेशन सोसायटी के सचिव तथा प्रसिद्ध उद्योजक चंद्रकांत रानडे, भारतीय शिक्षण मंडल के विदर्भ प्रांत के मंत्री पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. नारायण मेहरे और लोकनायक बापूजी अणे महिला महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. दुर्गेश कुंटे उपस्थित थे।
कार्यक्रम की पूर्वपीठिका और अतिथियों का परिचय कराते हुए डॉ. कुंटे ने कहा की मुकुलजी का व्यक्तित्व और कृतित्व इतना व्यापक और बहुआयामी है कि एक व्यक्ति के जीवन काल में इतना ढेर सारा लेखन, व्याख्यान और विविध प्रकार के कार्यशालाओं का आयोजन करना कोई एक व्यक्ति कर सकता है यह अविश्वसनीय प्रतीत होता है किंतु कानिटकरजी से मिलकर यह असंभव कार्य भी संभव प्रतीत हुआ।
प्रमुख मार्गदर्शक मुकुल कानिटकर ने प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति के स्वरूप का विवेचन कर उसकी उपादेयता और महत्ता को अधोलिखित किया। अगर भारत पुनश्च एक बार विश्वगुरु बनना चाहता है, तो उसके लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति यह पहला चरण है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पूर्णता भारतीय होने के साथ-साथ भारतीयों को केंद्र में रखकर उनके सर्वांगीण विकास के द्वारा राष्ट्र का उत्थान को ध्यान में रखकर इसका निर्धारण किया गया है। अस्तु, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का क्रियान्वयन अत्यधिक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
इस क्रियान्वयन की प्रक्रिया के केंद्र में शिक्षक की भूमिका अहम है क्योंकि शिक्षक ही वह माध्यम है जिसके द्वारा नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति सफलतापूर्वक क्रियान्वित और उसके माध्यम से निर्धारित उद्देश्यों को साधने तथा लक्ष्य तक पहुंचने में सहायक सिद्ध हो सकती है। इसलिए शिक्षकों का नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का अध्ययन, चिंतन और मनन करना चाहिए, जिससे समाज तथा राष्ट्रनिर्माण के दायित्व का निर्वहन करना चाहिए।
अध्यक्षीय मंतव्य देते हुए श्रीयुत दिवाकरराव पांडे ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के निर्धारण में जो विभिन्न घटनाएं हुई उनका उल्लेख करते हुए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आवश्यकता उपयोगिता पर अपने विचार प्रकट किए।
यह कार्यक्रम सिर्फ शिक्षकों के लिए आयोजित किया गया था। कोरोना के नियमों का ध्यान रखते हुए सीमित श्रोतागण निमंत्रित किए गए थे। और ज्यादा से ज्यादा लोग इस कार्यक्रम से लाभान्वित हो इसलिए इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण फेसबुक के माध्यम से किया गया था।
इस कार्यक्रम में यवतमाल के चुनिंदा प्रधानाचार्य,प्राध्यापक तथा शिक्षक उपस्थित थे। इस कार्यक्रम का सूत्र संचालन सह. प्रा. डॉ. संतोषकुमार गाजले तो वहीं आभार प्रदर्शन प्रोफेसर डॉ. कविता तातेड ने किया, कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगीत से हुआ। फेसबुक लाइव प्रसारण की जिम्मेदारी प्रा. सौरभ वगारे ने की।
कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रा. विराट घुड़े, डॉ. सरिता देशमुख, प्रा. डॉ मनीषा क्षीरसागर, नितीन वालदे, वैभव चौधरी आदि लोगों ने परिश्रम लिए।