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सेनिटाइजर, मास्क, पीपीई किट्स की घटी मांग


जिंदगी वापस पटरी पर लौटने लगी  

नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। भीषण महामारी कोरोनाकाल के समय दुनिया में जहां जान बचाने के लिए सामान्य नागरिकों के साथ स्वास्थ्य कर्मचारी, नर्स, डॉक्टर्स, सैनिटाइजर, मास्क का प्रयोग करते थे। साथ ही पीपीई किट्स पहनकर मरीज के साथ डॉक्टर्स, परिवार के सदस्य, सफाई कामगार भी एक से डेढ़ वर्ष तक सख्त और जरूरी स्वास्थ्य सुविधा को अपनाने में लगे रहे। कुछ हद तक लाखों लोगों की जान भी बचाई गई। 

भारत सरकार की सूझबूझ से दुनिया में वैक्सीनेशन की सहायता से भी करोड़ों  लोगों को बचाया गया। कोरोनाकाल के समय डिटर्जेंट, साबुन, क्लीनर्स का प्रयोग भी बहुत किया गया। १३९ करोड़ देशवासियों को जहां २७८ करोड़ वैक्सीनेशन की आवश्यकता थी। उसमें से वर्तमान समय में १७४ करोड़ वैक्सीनेशन दिए गए है। अभी कोरोना महामारी, ओमीक्रोन पूर्ण रूप से खत्म नहीं हुई है। जबकि भारत के युवा वर्ग के साथ किशोर अवस्था का टीकाकरण भी शुरू है। 

बाल्यकाल के समूह के बच्चों का टीकाकरण पूर्ण रूप से अभी होना बाकी है। चूंकि वैक्सीनेशन कार्यक्रम से कोरोना महामारी की रफ्तार धीमी पड़ गई है। जिससे दो टीका लेने के बाद ६० वर्ष से अधिक आयुवाले बुजुर्ग लोगों को अभी तीसरा टीका लगाया जा रहा है। फिर भी सभी देशवासियों को हमेशा अपने हाथ साफ तरीके से धोकर खाना खाने की जरूरत है। साथ ही जहां जरूरी हो वहां मास्क पहनकर घूमना होंगा। 

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी हो वह दूरी भी अस्पताल, सार्वजनिक भीड़ के स्थान से बचना कुछ समय के लिए जरूरी है। महामारी से बचने के लिए टीके के अलावा दवा गोलियां, कैप्सूल, लिक्विड दवाइयां भी रिसर्च के बाद बनाई जा रही है। अनेक अस्पताल, कार्यालयों में मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। सार्वजनिक स्थानों पर भी मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग कम हो गया है।
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