नारी तू नारायणी
नारायणी तू महान है,
देवो का अभिमान है,
हर कुल की तू शान है,
कभी बेटी, कभी पत्नी और
प्यारी सी माँ तू।। हर क्षेत्र में,
विजयी बन सरोजिनी, लता, और
कल्पना है तू।।
पति विरह को हसकर सहती
वो उर्मि है तू, 14 वर्ष वन में
बितानेवाली सीता संगिनी है तू।।
वेदों को लिखनेवाली घोषा है तू
कभी लक्ष्मी, कभी काली, कभी
दुर्गा है तू तेरे रूप अनेक है क्योकि
राम की शक्ति पूजा हैं तू।।
जिस कुल के बाग में खिलेगी ये
महकती कालिया उस अंजुमन की बहार है बेटियां।।
तुझसे ही सारा
जहाँ है, संस्कृति का अभिमान
है तू नारायणी नमोस्तुते तेरा
रूप सत्य मे है तू है शिवम
सुंदरम मे तू हैं
कलियों के खिलने मे तू,
भौंरों के गुंजन मे तु
विश्व के समस्त पटल पर
पूज्यनीय है।।
- रेखा तिवारी,
14 मालवीय नगर, खामला, नागपुर