परमाणु युद्ध से बचने अहिंसा, शांति वार्ता ही सर्वोत्तम उपाय
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नाटो, यूरोप, यूक्रेन, रूस के नेताओं की लापरवाही से तृतीय विश्वयुद्ध का खतरा
नागपुर(आनंदमनोहर जोशी)। यूक्रेन पर रूस के लगातार हमले को देखते हुए सम्पूर्ण यूरोप, रूस जैसे देश परमाणु बॉम्ब, बारूद, पेट्रोल बम के बीच स्वयं समाप्त होंगे ही साथ साथ अन्य दुनिया के देश के लिए भी खतरा बन चुके है। जहां यूक्रेन में रूस के मिसाइल, टैंक, एटॉमिक हथियार, पेट्रोल बम दहशत मचा रहे है। वहीं बख्तरबंद वाहन, सैनिक टैंक, हेलीकॉप्टर, हवाईजहाज भी क्षतिग्रस्त हो रहे है। एक ओर जहां मानव संसाधन विकास के साथ कंप्यूटर, मशीनरी का निर्माण अपने फायदे के लिए कर रहा है। वहीं परमाणु बम, एटॉमिक बम से विकास किए गए परिसरों को क्षतिग्रस्त कर रहा है।
समाचार प्राप्ति के लिए इंटरनेट, वेबसाइट, संचार सुविधा, मीडिया को भी रूस - यूक्रेन महायुद्ध के दौरान आक्रोश का शिकार होना पड़ रहा है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध, स्वतंत्र समाचार नेटवर्क को भी बंद कर दिया जाना गंभीर चिंता का विषय है। हिंसा की वारदात युद्ध के समय आधुनिक देश में होना भी मानव उत्थान के लिए रुकावट बन रही है। वहीं कुछ देशों की मदद से भारतीय नागरिक की सकुशल वापसी भी सराहनीय कदम जरूर है। साथ ही विश्व की पूर्व महाशक्तिया चीन, अमेरिका, रूस जहां हिंसक युद्ध के दौरान हथियार, परमाणु युद्ध का हवाला दे रहे है।
चीन, ब्रिटेन, अमेरिका, रूस के युद्ध के समय शांति वार्ता की पहल नहीं करना आश्चर्य की बात है। वहीं भारत सरकार के ऑपरेशन गंगा को रोमानिया, हंगरी, पोलैंड जैसे देश की मदद भी मिल रही है। जिससे कि हजारों भारतीयों को स्वदेश लाने में मदद मिल रही है। दूसरी ओर खारकीव हिंसा के भीषण युद्ध में भारतीय छात्र कर्नाटक निवासी इक्कीस वर्षीय नवीन ज्ञानगौदर की मृत्यु हुई। उच्च शिक्षा लेने गए हजारों भारतीय को यूक्रेन में खतरा अभी भी बना हुआ है।खार्किव सहित कीव शहर में हिंसक वातावरण युद्ध में बना हुआ है। ऐसे समय हिंसा को अहिंसा और शांति वार्ता से ही समाप्त किया जा सकता है।
एक ओर सर्वधर्म समभाव के विश्व में मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारे में मानव शांति और उत्थान के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर भौतिक, रसायन, जैविक हथियार से प्रथ्वी पर कोरोना, ओमिक्रिन महामारी के बाद परमाणु युद्ध होना गंभीर चुनौती बन रही है। प्राकृतिक महामारी पर वैक्सीनेशन, सैनिटाइजर के साथ उचित दूरी के लाभकारी परिणाम सार्थक सिद्ध हुए। वहीं लंबी दूरी तक के देश में समुद्र के आरपार युद्ध टैंक, मिसाइल, परमाणु, एटम बम से हो रही हिंसा पर नियंत्रण भी जरूरी है। इसके लिए अहिंसा, शांति वार्ता, आपसी वार्ता ही सर्वोत्तम उपाय होंगा।