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कोरेगांव के डी पी भोसले कॉलेज में राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न


नागपुर/पुणे। रयत शिक्षा संस्थान द्वारा संचालित डी.पी. भोसले महाविद्यालय, कोरेगांव का हिंदी विभाग और नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला दि. 29 मार्च को संपन्न हुई। इस कार्यशाला में *देवनागरी लिपि का महत्व एवं उपयोगिता* इस विषय पर विचार मंथन हुआ। 

इस समारोह के लिए मुख्य अतिथि के रुप में नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली के महामंत्री डॉ हरि सिंह पाल उपस्थित थे। नागरी लिपि परिषद की स्थापना एवं उसके विकास पर महामंत्री ने अपना मंतव्य व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह देश हित एवं राष्ट्रीय एकता के लिए एक भाषा आवश्यक होती है उसी तरह एक लिपि भी आवश्यक होती है। देश के लिए जिस एक लिपि की आवश्यकता है, वह देवनागरी है। शून्य का आविष्कार भी नागरी लिपि की ही देन है। 

इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की डॉ. मुक्ता कौशिक ने अपना मंतव्य देते हुए कहा देवनागरी लिपि विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है। इसलिए आधुनिक युग के नेताओं एवं विचारको ने देवनागरी को राष्ट्र लिपि बनाने का आग्रह किया। हिंदुस्तान की एकता के लिए देवनागरी की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने इस समय यह भी कहा कि लोकमान्य तिलक ने भी राष्ट्र लिपि के रूप में देवनागरी की घोषणा की थी। देवनागरी एकता की लिपि है।

गुजरात से डॉ. शोभना जैन ने देवनागरी लिपि का संपूर्ण इतिहास श्रोताओं के सामने रखा। उन्होंने कहा कि गुजरात के नागर ब्राह्मणों की भाषा से देवनागरी का विकास हुआ है। सम्राट अशोक के काल से ही यह विकसित होने लगी थी आगे चलकर तिलक ने लिपि सुधार की भावना व्यक्त की और महादेव गोविंद रानडे ने लिपि सुधार समिति स्थापित की। आज यह लिपि एक सक्षम लिपि है। 

समारोह के अध्यक्ष नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली के कार्याध्यक्ष डॉ शहाबुद्दीन शेख जी ने नागरी लिपि परिषद के संपूर्ण इतिहास पर विचार व्यक्त किए। राष्ट्रीय एकता के लिए केवल देवनागरी लिपि ही सक्षम है इस वक्तव्य को उन्होंने जोर देकर कहा। देवनागरी लिपि पूर्णता वैज्ञानिक है और आज कंप्यूटर, मोबाइल आदि माध्यमों में भी यह प्रयुक्त होती है। देवनागरी लिपि की उपयोगिता के सभी आयामों पर उन्होंने चर्चा की। 

अध्यक्षीय मंतव्य से पहले डॉ सिराज शेख और प्रा. श्रीमती मुल्ला मैडम ने कुछ जिज्ञासाए व्यक्त की और इन जिज्ञासाओं का समाधान वक्ताओं ने किया। कार्यशाला का समन्वयन डॉ सिराज शेख ने किया। इसका संयोजन हिंदी विभाग प्रमुख श्रीमती मुल्ला मैडम ने किया। सह संयोजन डॉ महेश बनकर ने किया। 

इस कार्यशाला के लिए विशेष मार्गदर्शन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ विजयसिंह सावंत, उप प्राचार्य डॉ विजय वाड़ते, अग्रणी महाविद्यालय के चेयरमैन डॉ नितिन निकम और तकनीकी सहायक केतन जाधव से मिला। इस कार्यशाला में देश के लगभग सभी राज्यों से लोग जुड़े थे। कार्यशाला का आयोजन सफल रहा।
साहित्य 5594604785393349955
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