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उस अदृश्य शक्ति से संवाद के दरमियान पवित्र भावना अत्यंत महत्वपूर्ण!


अभी इन दिनों मेरे कुछ निकटस्थ लोगों के ख़राब स्वास्थ्य को लेकर मैं अत्यंत चिंतित रही हूँ, जिनमें से कुछ पारिवारिक और कुछ आत्मीय रूप से जुड़े लोग हैं।अब ऐसे कठिन दौर में अपने घर के सदस्य के लिये तो जितना सम्भव हो उतना ध्यान, सहयोग, समर्पण प्रदान कर स्वास्थ्य लाभ में मदद के लिये प्रयास किया जा सकता है, पर उनका क्या जिनकी कितनी भी दयनीय हालत से अवगत होने के बावजूद हम सिर्फ सांत्वना ही दे पाते हैं क्योंकि विभिन्न व्यक्तिगत प्राथमिकताओं, जिम्मेदारियों व दूरी के कारण हम असहाय पड़ जाते हैं। 

उनकी तकलीफों से हम बेचैन से रहते हैं, उस वक्त हमें खुद को सांत्वना देने की आवश्यकता पड़ जाती है और  हम अपने मन को एकाग्र कर हृदय की गहराई से प्रार्थना करने लगते हैं। और निश्चित रूप से यह प्रार्थना ही खुद को संबल प्रदान करने में और पीड़ित को उम्मीद व आसरा देने में बेहद प्रभावशाली, अहम व सार्थक सिद्ध होती है।

उपरोक्त गहन विश्लेषण, दरअसल मेरी वर्तमान स्थिती के ताजा मनोभाव की गम्भीर अनुभूति के उपरांत विसरित विचार प्रवाह है। हुआ यूँ कि दो दिन पहले मैं अपने किसी आत्मीय की बीमार हालत से विचलित थी और अपने आराध्य देव के नाम जाप में किसी तरह खुद को ढांढस बंधा रही थी। मन व्याकुल था, कुछ काम में ध्यान लगा पाना दूभर हो रहा था इसलिये मैं अपने निवास के परिसर में टहलते हुए लगातार प्रार्थना में लीन थी। तभी दो बच्चियां जो करीब 9-10 साल की उम्र की हैं, और मुझसे बेहद प्रेम व आत्मीयता से मिलती हैं दौड़ते हुए मुझे अभिवादन करने मेरे करीब आईं और मैंने उन दोनों को आलिंगनबद्ध कर लिया। 

उस पल मेरे अकेलेपन में उन दोनों दिव्य आत्माओं का साथ मेरे लिये एक आश्वासन सूचक व अत्यंत शांतिदायक था। उनकी निरीहता व दिव्यता की मैं कायल हूँ इसलिए मन में विचार आया क्यों न इस अवसर को, इस पल को अविस्मर्णीय बनाया जाये। मैंने उनसे प्रेमपूर्वक आग्रह किया कि चलो हम तीनों किसी नेक आत्मा के स्वास्थ्य लाभ के लिए एक प्रार्थना करते हैं। हमें 4 मिनट के दिव्य जाप के दरमियान हाथ जोड़े हुये, अपनी आँखें बंद रखनी है और शारीरिक तकलीफ से परेशान आत्मा के निमित्त अपना हीलिंग वाइब्स प्रेषित करना है। 

वे दोनों जिज्ञासु दिव्य भाव की मल्लिकाओं ने तुरंत मेरा आग्रह स्वीकार कर लिया और हम तीनों ने मिलकर खुले आसमान के तले सर्वशक्तिमान को साक्षी मानते हुए प्रार्थना किया। उस पल की भाव भंगिमा और उन दोनों कन्याओं की गंभीरता देखकर मैं अचंभित रह गयी। निश्चित रूप से यह एक दिव्य पल था. जो ऊपर वाले ने मेरी व्याकुलता देख निर्देशित और संयोजित किया था और हम तीनों निमित्त बने हुए थे।

मेरी इस अनुभूति से एक बार फिर मैं पूर्ण विश्वास के साथ यह सिद्ध करने में समर्थ हूँ की प्रार्थना करने से हमारे अंदर एक शक्ति का उदय होता है नाकारात्मक व भयभीत करने वाली ऊर्जा नष्ट होती है और सकारत्मक ऊर्जा का संचार होता है और हम परमात्मा के सम्पर्क में होते हैं और उनकी कृपा दृष्टि हम पर जरूर पड़ती हुई अनुभूत होती है। ऊर्जा के उच्चतम स्रोत से संवाद करने के लिए भक्ति योग, ज्ञान योग या धर्म शास्त्रों में विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं है। 

एक साधारण इन्सान भी अपनी समझ से जो ठीक लगे दिव्य भाव व पूर्ण समर्पण से प्रार्थना, दुआ या अरदास करे वही पर्याप्त है और हम भरोसा कर सकते हैं कि वह अदृश्य शक्ति तक ये ज़रूर पहुंचेगा और और उस पर अनुमोदन क्रियान्वयन भी ज़रूर होगा। और सचमुच जिनके निमित्त हमने छोटी सी साधना की वहां से सन्तोषजनक समाचार भी मिला। स्मरण रहे इस पूरे दिव्य क्रियाकलाप में हमारे अंदर की पवित्र भावना व अटूट आस्था अत्यंत महत्वपूर्ण है।

- शशि दीप
विचारक/ द्विभाषी लेखिका
मुंबई
shashidip2001@gmail.com

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