मोबाइल, मीडिया व संचार का सशक्त माध्यम : डॉ जया सिंग
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नागपुर पुणे। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज द्वारा आभासी संगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसका विषय "मोबाइल बच्चों के लिए कितना उपयोगी कितना घातक" विषय पर मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित डॉक्टर जया सिंग, विभागाध्यक्ष, रायपुर छत्तीसगढ़ ने कहा कि मोबाइल एक ऐसी चीज है जो विश्व में सभी के लिए आवश्यक हो गई है।
कोई भी सूचना को एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से हम भेज सकते हैं। यह मीडिया व संचार का सशक्त माध्यम है।मोबाइल का परिवार में निश्चित कर देना तथा बच्चों को मोबाइल देना माता-पिता की जिम्मेदारी है। बच्चों को समझे और उन्हें मार्गदर्शन दें।
अध्यक्षता डॉ. शहाबुद्दीन नियाज़ शेख, विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज के अध्यक्ष महोदय के द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि मोबाइल अत्यंत ही उपयोगी आवश्यक साधन के रूप में सर्वत्र उपयोगी है। शिक्षा के क्षेत्र में दिनोंदिन मोबाइल की आवश्यकता बढ़ रही है। ज्ञान के दृष्टिकोण से भी मोबाइल बच्चों और बड़ों सभी के लिए उपयोगी होते जा रहा है। अतः इसका उपयोग हमें आवश्यक ज्ञान के बातों के लिए ही करना चाहिए।
प्रस्तावना डॉक्टर गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी,विश्व हिंदी साहित्य संस्थान प्रयागराज की सचिव महोदय ने कहा कि मोबाइल से किरणे जो निकलती है वह शारीरिक एवं मानसिक रूप से घातक है।अतः छोटे बच्चों को मोबाइल उपयोग ना करने दें। अगर आवश्यक हो तो अभिभावक उनके साथ बैठकर उनके समस्याओं का समाधान करें।
वक्ता के रूप में उपस्थित थे डॉ देवाशीष महापात्र,एसोसिएट प्रोफेसर, संबलपुर, यूनिवर्सिटी उड़ीसा ने कहा कि महर्षि चरक जिस प्रकार औषधि रूप में है उसी प्रकार मोबाइल भी एक औषधि के समान है।मोबाइल एक आवश्यक संचार माध्यम है। सभी के लिए अतः टेक्नोलॉजी के द्वारा पल पल बच्चों के लिए यह उपयोगी है अति सर्वत्र वर्जिते है लेकिन जब कोई अति होता है तब उसका नुकसान भी है।
वक्ता के रूप में उपस्थित डॉक्टर सुधासिन्हा, बिहार, ने कहा कि मोबाइल से बच्चों को लाभ और हानि दोनों ही हैं क्योंकि सारी दुनिया मोबाइल पर ही सिमट गई है।
कार्यक्रम का प्रारंभ श्रीमती भुवनेश्वरी जायसवाल रायपुर छत्तीसगढ़ के सरस्वती वंदना से हुआ। प्राध्यापिका रोहिणी दावरे अकोले, महाराष्ट्र ने स्वागत उद्बोधन दिया।
गोष्ठी का सफल एवं सुंदर संचालन डॉक्टर मुक्ता कान्हा कौशिक हिंदी सांसद छत्तीसगढ़ प्रभारी ने किया। तथा आभार व्यक्त युवा संसद श्री लक्ष्मीकांत वैष्णव ने किया।
इस आभासी गोष्ठी में समस्त साहित्यकार, कवि एवं शिक्षक गण उपस्थित रहे।
