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गलती


गलत मैं हूं तो
सही तू भी तो नहीं ,
इस सही गलत के चक्कर में
यूं बेकार टक्कर में, 
गलत तू भी है
तो सही मैं भी नहीं।

यूं कुछ भी तो
पूरी तरहा सही होता नहीं 
और कुछ भी 
शत प्रतिशत गलत होता भी नहीं, 
वजह गलत चश्मा है दोस्त मेरे, 
मेरी तूने पहन रखी है,  
और तेरी मैंने, 
आ जा, 
मेरे चश्मे से तू देख ले जरा
और तेरे चश्मे से मैं, 
फिर समझ जाएंगे दोनों, 
गलत मैं भी नहीं, 
गलत तू भी नहीं।।

- डॉ. शिवनारायण आचार्य 'शिव'
नागपुर (महाराष्ट्र)
काव्य 4886697586319767573
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