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वाहनों के चलन पर नियन्त्रण से रोक सकतें ईंधन की बढ़ती कीमतें


नागपुर (आनंदमनोहर जोशी)। देश में पेट्रोल, डीजल, गैस, केरोसिन के भाव में तेजी से वृद्धि हुई है। दो साल पहले महामारी और पचास दिन से चल रहे यूक्रेन, रूस के युद्ध के कारण पेट्रोल, डीजल के साथ अन्य वस्तुएं काफी महँगी हो चुकी है। देशभर के पेट्रोल पम्प पर पहले की तरह कतारें नहीं लग रही है। इसका असर सभी वर्ग पर पड़ रहा है। 

गरीब और मध्यम वर्ग ऑटोरिक्शा, पैदल, कैब, मैक्सी, सरकारी  बस का सहारा लेकर कार्यलय नौकरी पर जाने लगे है। उच्च वर्ग भी कार के जगह यदि दुपहिया वाहन का प्रयोग करें, तो भारत जैसे देश में पेट्रोल की बढ़ती कीमत पर नियन्त्रण हो सकता है। 

भारत में सरकारी कार्यालय, बैंक,रेलवे,हवाई अड्डे,बस स्टेशन, सामान्य निजी क्षेत्र में काम करनेवाले कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश मिलता है। निजी क्षेत्र के कहीं  कहीं  प्रतिष्ठानों में 75 वर्ष बाद भी कर्मचारियों को साप्ताहिक अवकाश की सुविधा नहीं है। यदि निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठान के कर्मचारियों को एक दिवसीय जरुरी अवकाश दे  दिया जावे, तो लगातार एक माह काम करने के बीच कर्मचारियों को अवकाश के साथ दुपहिया वाहनों के ईंधन पेट्रोल की हजारों लीटर बचत होंगी। 

आज बैंक, सरकारी कार्यालय में सप्ताह में दो बार दो दो दिन का शनिवार,रविवार के अवकाश मिलने से भी अनेक दुपहिया, चारपहिया वाहनों के प्रयोग नहीं होने से पेट्रोल की काफी बचत हो रही है। इसके साथ साथ प्रत्येक नागरिक जिनके कार्यालय डेढ़ से दो किलोमीटर है, ऐसे नागरिक यदि पैदल आवागमन करें तो शरीर को व्यायाम मिल सकता है। पेट्रोल ईंधन भी बचेगा। अनेक नागरिक अवकाश के दिनों में घूमने जाते थे ,उनकी संख्या भी महंगाई के वजह से घट रही है। अधिकांश नागरिक अब नजदीकी बगीचे की वाकिंग कर रहें हैं। 

साथ ही स्थानीय पर्यटन के स्थान को महत्त्व दें रहे हैं। इसके साथ साथ होटल लॉज के स्थान पर महामारी काल के बाद घर पर ही व्यंजन, खानपान डिलीवरी से मंगवा रहे है। इससे भी पेट्रोल, डीजल की बिक्री पर असर पड़ने लगा है। मेट्रो स्टेशन और मेट्रो रेल से भी ईंधन की बिक्री पर नियंत्रण हो रहा है।
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