फर्ज
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बहुत से फर्ज निभाना है।
बहुत से धागे उलझ गए हैं
उसे भी सुलझाना है।
बेटे का जो फर्ज है उसे भी
निभाना है।
जिंदगी धीरे चलो कुछ फर्ज अभी
निभाना है।
बहना का प्यारा भाई हूं
उसका भी जीवन संवारना है।
पिता में बन गया भविष्य
संतानों का संवारना है।
जिंदगी धीरे चलो कुछ फर्ज
अभी निभाना है।
इसी जन्म के फर्ज मुझे
इसी जन्म में निभाने दो।
टूट गए जो रिश्ते उन्हें भी
सुलझाना है।
उधार में मिली है जिंदगी धरती का
ऋण चुकाना है
जिंदगी धीरे चलो कुछ फर्ज अभी
निभाना है।
- सविता शर्मा, मुंबई