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श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय, नेवासा को ‘ए’ श्रेणी


 
नागपुर/अहमदनगर। संत शिरोमणि श्री ज्ञानेश्वर जी की कर्म स्थली अर्थात् संतश्रेष्ठ श्री ज्ञानेश्वर जी का महान ग्रंथ 'श्री ज्ञानेश्वरी' का निर्मिति स्थल पुनीत नगरी श्रीक्षेत्र, नेवासा, जिला अहमदनगर, महाराष्ट्र में 1968 में स्थापित श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय को 'राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद' अर्थात ‘नैक’ की ओर से हाल ही में 'ए' श्रेणी प्राप्त हुई है। 

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले से संलग्नित नेवासा तहसील में मुला एज्युकेशन सोसाइटी द्वारा संचलित श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय, नेवासा को एक ग्रामीण क्षेत्र के महाविद्यालय के रूप में जाना जाता है। 

एक पौधे के रूप में स्थापित यह महाविद्यालय आज एक विशाल वटवृक्ष के रूप में कार्यरत है। इस महाविद्यालय ने लगभग अर्धशतक से अधिक कालावधि में शिक्षा, साहित्य, विज्ञान व शोध के क्षेत्र में अनुपम योगदान दिया है।

आरंभ से ही इस महाविद्यालय ने अपनी उज्ज्वल परंपरा को निरंतर अबाधित रखा है। अध्ययन, अध्यापन व अनुसंधान में भी महाविद्यालय ने उत्कृष्ट प्रगति साधी है। 'राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद' (नैक) की समिति ने हाल ही इस महाविद्यालय का प्रत्यक्ष निरीक्षण व मूल्यांकन करके ‘ए’ श्रेणी दी है। 

महाविद्यालय ने इस मूल्यांकन की चतुर्थ प्रक्रिया में भी अपने स्तर को विकसित करते हुए ‘ए’ श्रेणी (ग्रेड) को बरकरार रखा है। मुला एज्युकेशन सोसाइटी, सोनई के संस्थापक श्री यशवंतराव जी गड़ाख पाटिल, मार्गदर्शक तथा विधायक श्री शंकररावजी गड़ाख पाटिल, सौ. सुनिता ताई गड़ाख, 

मुला एज्युकेशन सोसाइटी के अध्यक्ष श्री. प्रशांतभाऊ गडाख, उपाध्यक्ष श्री. उदयन दादा गड़ाख, महाविद्यालय गुणता प्रकोष्ठ के सचिव डॉ. सुभाष देवढे,  संस्था के सचिव प्राचार्य उत्तमराव लोंढे व संयुक्त सचिव डॉ. विनायक देशमुख, संस्था के शोध प्रभारी डॉ. अप्पाराव, संस्था के ‘नैक’ समन्वयक डॉ. संदीप खेड़कर, सोनई महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शंकर लावरे आदि का निरंतर मार्गदर्शन व प्रेरणा इस महाविद्यालय को प्रगति पथ पर रखने में निरंतर संबल प्रदान करता रहा। 

श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय, नेवासा के प्राचार्य डॉ. गोरक्षनाथ कल्हापुरे की कर्मठता, कर्तव्यदक्षता व समय सूचकता महाविद्यालय को गतिशीलता प्रदान करने में निरंतर सक्षम रही है। 

महाविद्यालय के उपप्राचार्य डॉ. अरुण घनवट, ‘नैक’ समन्वयक डॉ. दिनकर आवारे, डॉ. उमेश कांबले, उपप्राचार्य प्रा. दशरथ आयनर, पर्यवेक्षिका प्रा. राधाताई मोटे सहित सभी प्राध्यापक, प्रशासकीय कर्मचारी, सेवक वृंद, छात्र वर्ग, अभिभावक आदि की भी महाविद्यालय को लक्ष्य तक पहुँचाने में प्रशंसनीय भागीदारी रही है। श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय, नेवासा की इस अभिनव उपलब्धि के लिए महाविद्यालय से संबंधित सभी वर्गों को सभी स्तरों से बधाइयां दी जा रही है। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ.शहाबुद्दीन नियाज मुहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स व साइंस महाविद्यालय (स्वशासी), अहमदनगर के हिंदी शोध केंद्र के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. हनुमंत जगताप, संस्थान के महाराष्ट्र प्रभारी डॉ. भरत शेणकर, राजूर, महाराष्ट्र तथा संस्थान के वरिष्ठ सदस्य डॉ. बबन चौरे, पाथर्डी, महाराष्ट्र ने श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय, नेवासा में उपस्थित होकर प्राचार्य डॉ. गोरक्षनाथ कल्हापुरे का पुष्पगुच्छ से सम्मान किया तथा महाविद्यालय की उत्तरोत्तर प्रगति के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं दी। 

इस अवसर पर महाविद्यालय के उपप्राचार्य डॉ. अरुण घनवट, हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अमानुल्ला शेख तथा इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिगंबर सोनवणे की गरिमामयी उपस्थिति रही।

ज्ञात हो कि विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के अध्यक्ष तथा लोकसेवा महाविद्यालय, औरंगाबाद, महाराष्ट्र के पूर्व प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन शेख ने इसी श्री ज्ञानेश्वर महाविद्यालय में 1978 से 2008 तक 30 वर्ष की अवधि में हिंदी प्राध्यापक के रूप में अपनी अध्यापकीय सेवाएं अत्यंत सुचारू रूप से दी हैं।
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