हिन्दी व्यंग्य के शिरोमणि हैं परसाई : डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र
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नागपुर। व्यंग्यकार बनना सरल कार्य नहीं है। व्यंग्य लेखन के लिए समाज की ओर देखने की सूक्ष्म दृष्टि होनी चाहिए। व्यंग्यकार स्वभाव से ही साहसी होता है, क्योंकि वह समाज में व्याप्त बुराइयों को उजागर करता है। हरिशंकर परसाई में वह अदम्य साहस था। इसीलिए वे हिन्दी व्यंग्य के शिरोमणि कहलाते हैं। उक्त विचार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने व्यक्त किए।
वे हिन्दी विभाग, राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय द्वारा परसाई जन्मशती के निमित्त 'हिन्दी व्यंग्य और परसाई' विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि व्यंग्य समाज का दर्पण है। उसमें अभिव्यक्ति की अकुलाहट होती है। विद्रोह, प्रतिरोध और क्रांति की ललक व्यंग्य की ऊष्मा को प्रखर बनाती है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के प्र-कुलगुरु डॉ. संजय दुधे ने कहा कि व्यंग्य लोकजीवन की अभिव्यक्ति है। व्यंग्य समाज को सुधारने वाला साहित्य है। इसके माध्यम से सामाजिक चेतना का प्रवर्तन होता है। वरिष्ठ व्यंग्यकार श्री गिरीश पंकज, रायपुर ने कहा कि व्यंग्य के आदि प्रणेता संत कबीर हैं। परसाई उसी परंपरा को उत्कर्ष प्रदान करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह साहित्य की ऐसी देन है जो समाज को निर्मल बनाता है। डॉ. सिद्धार्थ कुमार श्रीवास्तव ने परसाई से जुड़े रोचक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि परसाई ने हिन्दी व्यंग्य को एक अनूठी पहचान दिलाई।
प्रास्ताविक रखते हुए हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज पाण्डेय ने कहा कि परसाई व्यंग्य को ऐसी स्प्रिट मानते थे जो कड़वी से कड़वी बात को सहज रुप से अभिव्यक्त करता है। सामाजिक विसंगतियों और विडंबनाओं को उभार कर व्यंग्य उनकी सर्जरी करता है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संतोष गिरहे ने और आभार प्रदर्शन डॉ. लखेश्वर चंद्रवंशी ने किया। इस अवसर पर डॉ. गोविन्द प्रसाद उपाध्याय, डॉ. नीरज व्यास, डॉ. आभा सिंह, डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, गिरीश पंकज, टीकाराम साहू, अनिल मालोकर ने अपनी व्यंग्य रचनाओं के माध्यम से परसाई को याद किया।
इस अवसर पर नगर के साहित्यकार संतोष पाण्डेय 'बादल', डॉ. मिथिलेश अवस्थी, नरेन्द्र परिहार, डॉ. अविनाश बागड़े, अनिल त्रिपाठी, डॉ. सुषमा नरांजे, डॉ. एकादशी जैतवार, डॉ. सुमित सिंह, डॉ. कुंजनलाल लिल्हारे, प्रा. जागृति सिंह, डॉ. गिरिजा शंकर गौतम, अजय पांडे, कृष्ण नागपाल, मधुलता व्यास सहित बड़ी संख्या शोधार्थी, विद्यार्थी तथा नगर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।


