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जंक फूड स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है : डॉ. हर्षिता


नागपुर/पुणे। जंक फूड के सेवन की व्यापकता ने हमारे समाज के सामने स्वास्थ्य संबंधी अभूतपूर्व संकट को उपस्थित किया है। यह उच्च तेल, चीनी और प्रोसेस्ड इंग्रीडिएंट्स से भरपूर होता है, जिनके लंबे समय तक उपभोग स्वास्थ्य को हानि पहुंचा सकता है। यह विचार डॉ. हर्षिता, सहायक प्राध्यापक- हिंदी, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय,नई दिल्ली ने व्यक्त किये। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में बृहस्पतिवार, 15 फरवरी, 2024 को ‘स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक फास्ट फूड के प्रचलन को कैसे कम किया जा सकता है’? विषय पर आयोजित राष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में वे अपना उद्बोधन दे रही थी। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान,प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे, महाराष्ट्र ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की। 

डॉ. हर्षिता ने आगे विशद किया कि, उपभोक्तावाद और आक्रामक विज्ञापन ने फास्ट फूड के उपभोग की इस प्रवृत्ति को अत्यधिक बढ़ावा दिया है। परिणामत: जंक फूड का अधिक सेवन स्थानीय और पारंपरिक आहार की अनदेखी करता है, जिससे लोगों की पोषण की आवश्यकताएं पूरी नहीं होती। इसके कारण एक ओर हम पारंपरिक खाद्य सामग्रियों को भूलते जा रहे हैं, वहीं दूसरी और यह स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं को बढ़ावा दे रहा है। अतः जंक फूड की मात्रा कम करना और पारंपरिक आहार को प्रोत्साहित करना स्वस्थ जीवन शैली के लिए महत्वपूर्ण है। डॉ. सुजाता जगन्नाथ रगडे, सहायक प्राध्यापक- हिंदी, मिलिंद कला महाविद्यालय, नागसेनवन, औरंगाबाद (वर्तमान छत्रपति संभाजी नगर), महाराष्ट्र ने अपने मंतव्य में कहा कि,कम समय में तैयार किए जाने वाले व्यंजन को फास्ट फूड कहा जा सकता है। जो लोग फास्ट फूड जैसे- पिज्जा, नूडल्स, चाऊमीन और मैदे की बनी चीजें खाते हैं, तब उन्हें बार-बार खाने को मन करता हैं। मैदे से बनी चीजों का पाचन नहीं होता, क्योंकि मैदे में स्टार्च और कार्बोहाइड्रेट ज्यादा मात्रा में होता है। पेट में ज्यादा समय रहने के कारण हाइड्रोक्लोरिक एसिड तैयार होकर जिससे एसिडिटी होती है और पेट में बैक्टीरिया और वायरस पनपने से पेट में इंफेक्शन होता है। वास्तव में जो चीज खाने में स्वादिष्ट लगती है, वही चीज हानिकारक होती है। 

आज की पीढ़ी को फास्ट फूड जेनरेशन कहते हैं। सरकार द्वारा पाठशाला तथा महाविद्यालय में उपहार गृह में फास्ट फूड पर पाबंदी लगाने का परिपत्र जारी कर दिया गया है। फास्ट फूड के अत्यधिक सेवन से मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, कैंसर, मोटापा जैसी बीमारियां उत्पन्न हो रही हैं। इससे बचने के लिए सात्विक और पोषक तत्वों से भरा खाना खाने की आवश्यकता है। बच्चों में घर के खाने की आदत डालना जरूरी है। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी ने अपने प्रास्ताविक भाषण में कहा कि फास्ट फूड यानी बंधा हुआ भोजन इसका दूसरा भाव यह भी निकाल सकते हैं बासी भोजन। घर में बासी भोजन हम तोहीन समझते हैं, पर वही बासी खाना चार-पांच गुना पैसा देकर मंगवाते हैं और बड़े ही चाव से खाते हैं। जंक फूड का सीधा अर्थ है, रद्दी या कूड़ा खाना। फास्ट फूड हमें मुफ्त में कब्ज,अल्सर, हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, नेत्र रोग, बहरापन, डायबिटीज, कैंसर जैसे रोग दे पाते हैं। दरअसल यह बहुराष्ट्रीय कंपनियों की आड़ में बाजार में कब्जा करने के लिए खाद्य उत्पादों को घटिया तरीके से बेचना शुरू किया गया है। अतः फास्ट फूड से नुकसान से बचने के लिए पारंपरिक पौष्टिक आहार पुनर्जीवित करना होगा। बच्चों को फास्ट फूड से दूर रखकर घर के खाने के प्रति उनमें रुचि पैदा करना जरूरी है। 

विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज के अध्यक्ष प्राचार्य डॉ. शहाबुद्दीन नियाज मोहम्मद शेख, पुणे,महाराष्ट्र ने अध्यक्षीय समापन में कहा कि एकल परिवार में पुरुष के साथ स्त्री भी नौकरी कर रही है। परिणामत: समय अभाव के कारण घर की स्त्री रसोई घर में जाने में कतराती हैं। अतः परिवार और बच्चों के लिए जंक फूड मंगवायें जाते हैं। बच्चों में फास्ट फूड की लत लगने से वे जंग फूड के सिवा कुछ भी खाना पसंद नहीं करते। अतः पूरा परिवार अनेक व्याधियों का शिकार हो जाता है। इसीलिए घरेलू व्यंजन बनाने और खाने में सभी को रुचि लेनी चाहिए। संगोष्ठी का शुभारंभ रजनी प्रभा, मुजफ्फरपुर, बिहार की सरस्वती वंदना से हुआ। अनुरीमां शर्मा, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने स्वागत भाषण दिया। संगोष्ठी का शानदार सफल, सुंदर संचालन तथा नियंत्रण विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज की छत्तीसगढ़ प्रभारी एवं ग्रेसियस शिक्षा महाविद्यालय अभनपुर, रायपुर की शिक्षा मनोविज्ञान की सह-प्राध्यापक  डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक 'मनु' ने किया। रतिराम गढ़ेवाल, रायपुर, छत्तीसगढ़ ने आभार ज्ञापन किया। इस गोष्ठी में 80 से अधिक प्रतिभागियों की गरिमामय उपस्थिति रही
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