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विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अभिनंदन मंच में फिल्मी ग़ज़लों ने बांधा समां


नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम अभिनंदन मंच (ज्येष्ठ नागरिकों का सम्मान) के अंतर्गत 'फिल्मी ग़ज़लों' का कार्यक्रम आयोजित किया गया। अध्यक्षता पूर्व जिला सत्र न्यायाधीश प्रकाश  तिजारे ने की। मंच पर श्रीमती तिजारे भी मौजूद थीं। अतिथियों का स्वागत शरद त्रिवेदी ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के माल्यार्पण व दीप प्रज्जवलन से हुआ। सरस्वती वंदना हेमलता मिश्र मानवी ने की। 30 गायकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का  संचालन डा. कृष्ण कुमार द्विवेदी ने किया।  

सर्वप्रथम शरद त्रिवेदी ने होशवालों को खबर क्या,  नवीन  त्रिवेदी ने चांदी जैसा रंग है तेरा, अल्पा तलाविया ने देख लो आज हमको, सुरेश धुंडे ने रंग और नूर की बारात किसे पेश करूं, शंकर मेश्राम ने  ना  किसी की आंख का नूर हूं, गोविंद राठी ने होंठो से छू लो तुम, शांतनु दास ने तुमको देखा तो ये खयाल आया, सतीश गजभिए ने मैं निगाहें तेरे चेहरे, सुमेध हुमणे ने कभी किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता, लक्ष्मीकांत  कोठारी ने जिंदगी से बड़ी सजा ही नहीं, विनायक चिंचोलकर ने ये हवा ये रात  ये चांदनी, लहर पटेल ने मेरे मेहबूब तुझे मेरी मोहब्बत की कसम, आंनद सूर ने हम तेरे  शहर, मीरा  ने जिए तो जिए कैसे बिन आपके, 

मिलींद नंदागवली ने कल रात  जिंदगी से मुलाकात होगी, प्रकाश पाटील ने अब क्या मिसाल दूं, प्रफुल्ल गायकवाड़ तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे, राजीव गायकवाड़ ने तेरी नज़र का सुरूर हूं, उषा गायकवाड़ ने नाराज नहीं  जिंदगी, प्रतिभा तभाने ने हूजूर आते आते बहोत देर कर दी, ओम प्रकाश कहाते ने आपके पहलू में आके रो दिये, सुरेश त्रिवेदी, राजेश देवराज, संतोष बुद्धराजा, पुष्पा मानकर, लीला पवार, राजेश प्रशांत ने भी सहभागिता की. कला व्यास, रमेश मौंदेकर, राजू हेडावू , अरूण नलग, आजम, समीर पठान की उपस्थिति रही.
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