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भारतीय लेखिकाओं के साहित्य में आधुनिक वैज्ञानिक चेतना का अंतर्प्रवाह'

                                  


राष्ट्रीय विज्ञान दिवस-2025 पर आभासी हिंदी संगोष्ठी का आयोजन  

नागपुर/कोलकाता। भारतीय भाषा शोध संस्थान' और 'भोजपुरी साहित्य विकास मंच' के संयुक्त तत्वावधान में एक आभासी राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन स्ट्रीमयार्ड से सीधे अंतर्प्रवाहित करते हुए संपन्न किया गया और इसका सीधा प्रसारण यूट्यूब पर किया गया।  

यह संगोष्ठी राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर आयोजित की गई थी तथा नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखरन वेंकट रमन को समर्पित थी। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2025 का मुख्य विषय था : "विकसित भारत के लिए विज्ञान और नवाचार में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय युवाओं को सशक्त बनाना’।

इस संगोष्ठी का केंद्रीय विषय 'भारतीय लेखिकाओं के साहित्य में आधुनिक वैज्ञानिक चेतना का अंतर्प्रवाह' था। मुख्य वक्ता भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (मुंबई) की संयुक्त निदेशक (राजभाषा) डॉ.रश्मि वार्ष्णेय थी। उनका व्याख्यान संगोष्ठी के केंद्रीय विषय पर आधारित था। उन्होंने चेतना का अर्थ बताते हुए साहित्यिक और वैज्ञानिक चेतना पर प्रकाश डाला। साथ ही, वैज्ञानिक चेतना से ओतप्रोत लेखन और विज्ञान विषयक लेखन का अंतर स्पष्ट करते हुए विभिन्न सात भारतीय भाषाओं की लेखिकाओं की रचनाओं में सन्निहित वैज्ञानिक चेतना पर चर्चा की, जो इस दिन अंतरिक्ष जगत में 07 ग्रहों (मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, अरुण, वरुण) के एक सीध में आने की दुर्लभ वैज्ञानिक घटना को इस संगोष्ठी के साहित्य जगत में चरितार्थ कर रहा था। ये भाषाऍं थीं : ॲंग्रेजी, कन्नड़, ओड़िया, गुजराती, बांग्ला, मराठी और हिंदी। 

रेवा विश्वविद्यालय (बेंगलुरु) की सहायक प्राध्यापिका डॉ. नंदिनी चौबे के व्याख्यान का शीर्षक 'भारतीय लेखिकाओं में वैज्ञानिक चेतना एवं नारी सशक्तिकरण' था। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (शिमला) से किन्नरों पर शोध कर रही भारती के आलेख का शीर्षक 'हिंदी साहित्य में विदुषी महिलाएं : एक वैज्ञानिक समाजशास्त्रीय अध्ययन' था। प्रखर गूंज पब्लिकेशन की सह संपादक आरती प्रियदर्शिनी ने उनके द्वारा रचित वैज्ञानिक कहानी 'आकाशगंगा का रहस्य' पर अपना वैज्ञानिक चिंतन प्रस्तुत किया।

स्वतंत्र लेखन के क्षेत्र में सक्रिय प्रिया श्रीवास्तव ने 'भारतीय लेखिकाओं का वैज्ञानिक चिंतन' शीर्षक से अपना आलेख पाठ किया। कल्याणी विश्वविद्यालय की शोधार्थी श्रद्धा गुप्ता 'केशरी' ने भी अपना सारगर्भित आलेख पाठ प्रस्तुत किया जिसका शीर्षक था - 'भारतीय लेखिकाओं के कथा साहित्य में वैज्ञानिकता'। युवा शिक्षिका प्रीति कुमारी साव (हावड़ा, पश्चिम बंगाल) के आलेख का शीर्षक 'आधुनिक वैज्ञानिक चेतना और भारतीय लेखिकाओं का साहित्य' था।
इस पूरे आभासी संगोष्ठी का कुशलतापूर्वक संचालन हिंदी विश्वविद्यालय (हावड़ा, पश्चिम बंगाल) की सहायक प्राध्यापिका डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी ने किया। संगोष्ठी के तकनीकी संचालन और प्रसारण का कार्य प्रकाश कुमार त्रिपाठी (शोधार्थी, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर) ने किया। इस पूरे आयोजन की परिकल्पना और रूपरेखा विनोद यादव (कोलकाता) ने तैयार की थी।
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