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लघुकथा सम्मेलन में कहानियां और संस्मरण


नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के साप्ताहिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में साहित्यिकी में लघुकथा सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ। एक से बढ़कर एक लघुकथाएं प्रस्तुत की गयी। अध्यक्षता घनश्याम आसुदानी ने की और संचालन हेमलता मिश्र मानवी ने किया और विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन का वृहद इतिहास विवेचित किया।

कार्यक्रम के आरंभ में रूबी दास ने अपनी लघुकथा  एकाकीपन  का सटीक विश्लेषण किया। डाॅ भोला सरवर ने दिन का महत्व बताते हुए कर्ज जहर है भाव पर आधारित लघुकथा प्रस्तुत की। माधुरी मिश्रा मधु ने संवेदना पर बात की। अमीता शाह ने बढिया संस्मरण पर तो सुरेन्द्र हरडे ने पेंशन का हिसाब लघुकथा पर बात की। राजीव गायकवाड़ ने दूरदर्शन प्रोड्यूसर का उत्तम संस्मरण सुनाया। डाॅ अजय उत्तडवार ने शिव खेडा के एक संवाद के उल्लेख के साथ अपनी लघुकथा प्रस्तुत की। 

घृति बेडेकर ने जानवरों की बातचीत के रूप में इंसानियत का पैगाम दिया। आराधना शर्मा ने अति सुन्दर लघुकथा सुनाई। माया शर्मा की लघुकथा और अरुणा की कथा सराहनीय रहीं। जय शंकर तिवारी ने कुयें और नदी के वार्तालाप पर बात की। संचालन के दौरान मानवी ने नेनो लघु कथाएं प्रस्तुत कीं और लघुकथाओं की रचना प्रवृत्तियों पर बात की। 

अध्यक्ष महोदय ने अपने वक्तव्य में सभी लघुकथाओं की सटीक समीक्षा की। स्वयं को साहित्य का विद्यार्थी मानते हुए उन्होंने बढ़िया लघु कथाएं प्रस्तुत कीं। लघुकथा न सुनाने वाले बडी संख्या में उपस्थित लघुकथा रसिकजनों ने कार्यक्रम का आनंद लिया।अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए संचालिका ने समापन की घोषणा की।
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