अमृत प्रतिष्ठान के नववर्ष संगीत समारोह में शास्त्रीय संगीत का जलवा
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नागपुर। शास्त्रीय संगीत क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान देने वाले संगीताचार्य स्व. पं. अमृतराव निस्ताने की स्मृति में तथा नववर्ष स्नेह मिलन संगीत समारोह का आयोजन अमृत प्रतिष्ठान, नागपुर की ओर से शनिवार 10 जनवरी को सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विगत 26 वर्षों से संगीत क्षेत्र में निस्वार्थ सेवा करने वाला यह प्रतिष्ठान सामाजिक दायित्व के साथ सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन कर रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध संतूर वादक पं. वाल्मीकजी धांडे, सरोद वादक पं. शंकर भट्टाचार्य, अध्यक्ष दिवाकर निस्ताने एवं सचिव मोरेश्वर निस्ताने के करकमलों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। सरस्वती वंदना एवं गुरुवंदना के पश्चात सोनाली अडावदकर ने सारगर्भित प्रस्तावना प्रस्तुत की तथा सूत्रसंचालन किया।
प्रथम सत्र में युवा तबलावादक आकाश जवादे ने एकल तबला वादन प्रस्तुत किया। तीनताल में बाज, कायदे, परन एवं रेला की प्रस्तुति ने श्रोताओं की भरपूर सराहना प्राप्त की।
द्वितीय सत्र में शास्त्रीय गायिका खुशबू कठाणे ने राग गोरख कल्याण में तीनताल की विलंबित स्वरचित बंदिश से गायन का आरंभ किया। इसके पश्चात मध्यलय में 'सांझ की बेला, शुभदिनी आज' बंदिश तथा 'चैत मास बोले रे कोलिया..' चैती को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने गायन का समापन भजन से किया। उनके सुरेल स्वर एवं जयपुर घराने की सशक्त गायकी से संपूर्ण वातावरण मंत्रमुग्ध हो गया और रसिक श्रोताओं से उन्हें भरपूर दाद मिली। उन्हें पं. अजय हेडाऊ (संवादिनी) तथा आकाश जवादे (तबला) की सुसंगत संगत प्राप्त हुई, जिसकी भी श्रोताओं ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों का पुष्पगुच्छ, गौरवपत्र एवं स्मृतिचिह्न प्रदान कर यथोचित सम्मान किया गया।
इस अवसर पर युवा छात्रा राधा ठेंगड़ी (खडसे) को नागपुर विश्वविद्यालय की ओर से कंठ संगीत में स्नातकोत्तर उपाधि तथा संगीताचार्य स्व. पं. अमृतराव निस्ताने स्वर्ण पदक प्राप्त करने के लिए सम्मानित किया गया। साथ ही अध्यक्ष दिवाकर (मोहन) निस्ताने को अमृत महोत्सवी वर्ष के उपलक्ष्य में विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
संगीत जगत के मान्यवरों एवं रसिक श्रोताओं की उपस्थिति में यह शास्त्रीय संगीत समारोह अत्यंत भव्यता एवं गरिमा के साथ संपन्न हुआ और सदैव स्मरणीय बन गया।
