जिजाऊ के विचारों को नमन : कन्या रत्न का हर्षोल्लास के साथ स्वागत
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स्वराज्य जननी, राजमाता जिजाऊ आऊसाहेब की जयंती के अवसर पर ‘स्त्री जन्म का स्वागत’
नागपुर/उमरखेड। स्वराज्य जननी राजमाता जिजाऊ आऊसाहेब एवं स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर, उमरखेड स्थित राजाराम उत्तरवार उपजिला रुग्णालय में इंटरनेशनल आइकॉन पुरस्कार एवं ISO प्रमाणन प्राप्त जिव्हाळा संस्था, उमरखेड जिला यवतमाल, महाराष्ट्र राज्य की ओर से विगत बारह वर्षों से निरंतर संचालित सामाजिक जागरूकता का अनूठा और सराहनीय उपक्रम ‘स्त्री जन्म का स्वागत’ भावनात्मक वातावरण में संपन्न हुआ।’स्त्री जन्म का स्वागत’ (बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ, बेटी पढ़ाओ) यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाली एक संवेदनशील सामाजिक आंदोलन है।
इस उपक्रम के अंतर्गत राजमाता जिजाऊ आऊसाहेब की जयंती के दिन उमरखेड तालुका में जन्मी नवजात कन्याओं के प्रति विशेष हर्ष व्यक्त किया गया। इस अवसर पर अस्पताल की महिला कर्मचारी इंचार्ज चलावार सिस्टर, इंचार्ज फुटाने सिस्टर, केंद्रे सिस्टर, मुके सिस्टर, पतंगे सिस्टर एवं नांदेकर सिस्टर के करकमलों द्वारा नवजात कन्याओं का स्वागत किया गया। नवजात कन्याओं को ड्रेस, माताओं को ब्लाउज पीस, पिताओं को शेला, साथ ही पेड़े एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर माता-पिता का सम्मान किया गया। “स्त्री जन्म का स्वागत” यह उपक्रम केवल सम्मान तक सीमित न रहकर, कन्या जन्म का स्वागत कर माता-पिता को मानसिक संबल, सामाजिक समर्थन एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करने वाला एक प्रेरणादायी प्रयास है।
इस अवसर पर जिव्हाळा संस्था के अध्यक्ष अतुल लताताई राम मादावार ने कहा कि जिव्हाळा संस्था पिछले बारह वर्षों से यवतमाल, हिंगोली, नांदेड एवं गडचिरोली जिलों में नवजात कन्याओं का स्वागत कर रही है तथा गांव-गांव जाकर स्त्री भ्रूणहत्या प्रतिबंध, कन्या शिक्षा एवं मातृत्व सुरक्षा के विषय में निरंतर जनजागृति का कार्य कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की प्रत्येक माता सुरक्षित रहे और प्रत्येक बालिका का जन्म स्वस्थ रूप से हो यह केवल अपेक्षा नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। इसी कारण प्रसव सरकारी अस्पतालों में ही हो, इस पर संस्था का दृढ़ एवं संवेदनशील आग्रह है। आज भी समाज में बालिकाओं का जन्मदर घट रहा है तथा स्त्री भ्रूणहत्या जैसी अमानवीय प्रवृत्तियाँ समाज पर कलंक बन रही हैं।
इस स्थिति को बदलने के लिए केवल कानून पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि मानव मन में सकारात्मक विचारों का परिवर्तन अत्यंत आवश्यक है। बेटी बोझ नहीं, बल्कि माता-पिता का सपना, परिवार का आधार, समाज की शक्ति और राष्ट्र के भविष्य का प्रकाश है इस विश्वास को प्रत्येक घर तक पहुँचाना ही हमारा लक्ष्य है। ‘बेटी बचाओ, बेटी बढ़ाओ, बेटी पढ़ाओ’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता से जन्मी एक संवेदनशील सामाजिक आंदोलन है। कन्या जन्म का स्वागत कर उसके माता-पिता का सम्मान करना, उनके संघर्ष में सहयोग देना और बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए संपूर्ण समाज को एकजुट करना यही इस उपक्रम की सच्ची आत्मा, वास्तविक अर्थ और प्रेरणा है।
इस कार्यक्रम में जिव्हाळा संस्था के संस्थापक अध्यक्ष अतुल लताताई राम मादावार, अस्पताल के कर्मचारी इंचार्ज चलावार सिस्टर, इंचार्ज फुटाने सिस्टर, केंद्रे सिस्टर, मुके सिस्टर, पतंगे सिस्टर, नांदेकर सिस्टर तथा जिव्हाळा संस्था के स्वयंसेवक श्रीकांत शहा, अभय उबाले सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
