कवि और कविता से दुनिया में क्रांति
नागपुर। ‘कवि और कविता ने ही दुनिया में क्रांति का आगाज किया है विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मंचासीन सीन प्रमुख अतिथि डा नीलकांत कुलसुंगे के शब्दों ने उपस्थित कवियों को गौरवान्वित किया।डाॅ कुलसुंगे मराठी हिन्दी साहित्य और नाटकों के क्षेत्र में संपूर्ण भारत में प्रतिष्ठित हैं। सम्मेलन में नववर्ष की मंगल कामना और सरस्वती वंदना के आरंभ के साथ मनीषियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं। सर्वश्री भोला सरवर ने कहा हठधर्मिता की जंग में अरमान मर गये तो तेजवीरसिंह की रचना ने कक्ष को जोश से भर दिया। कल्पना बारापात्रे ने नव-वर्ष को बुलाया तो तन्हा नागपुरी ने जवाबों का साल आया है कहा तो तेजिंदरसिंह ने रमते रहना कर्म क्षेत्र में का आव्हान किया मजीद बेग की रचना उलझ गये सवालों के जवाब में अमानी कुरैशी ने बढ़िया रचना दी अमीता नव-वर्ष पर लय सहित सुंदर रचना दी देवयानी की प्रस्तुति के बाद डाॅ राम मुले ने नववर्ष पर संकल्प दिये अशोक डोलस ने टूटे फूल की व्यथा कही और राजीव वर्मा ने विश्व गुरु भारत को पुकारा डाॅ शिवराम कृष्ण ने अर्जुन कृष्ण संवाद से सम्मेलन को ऊंचाईयां दीं मुकेश कुमार सिंह ने मेरे ही गाँव में गजल से रस बरसाया अंजुम उरूज ने झूठों को आइना गजल दी चंद्रकला भरतिया ने हार न मानने का आवाहन किया सईद हजरत की बढ़िया गजल के साथ गुलाम मोहम्मद खान ने कहा इंसान से इंसान कभी दूर न था अरुणा महेंद्रू ने नववर्ष मंगलमय रचना सुनायी आरिफ काजी ने फूल खुशबू समय साथ ले आया कहा तो शादाब अंजुम ने बढ़िया गजल और मानवी ने सुंदर पंक्तियाँ दी। अध्यक्ष सुधा राठौर ने अध्यक्षीय वक्तव्य के साथ सुंदर रचनायें सुनाईं।
अतिथि महोदय ने मराठी से हिन्दी अनुवादित रचनाएं सुनाई और उत्कृष्ट मार्गदर्शन किया। आयोजन में माधुरी मिश्रा मधु ररमेश मौंदेकर अजय नागर श्रीबनर्जी सहित बड़ी संख्या में कावय रसिकों ने आनंद लिया। अतिथि स्वागत शादाब अंजुम ने और संचालन हेमलता मिश्र मानवी ने किया।