किसी भी कला गुणों को सिखने वाले बच्चे जीवन में उन्नति करते ही है : धर्मेंद्र पाटिल
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उभरते सितारे मे 'त्योहारों का महत्व'
नागपुर। आज इन बच्चों की प्रस्तुति देखकर बहुत अच्छा लगा। इन बच्चों के कला गुणों के लिए उनके माता-पिता को धन्यवाद। जिन्होंने, आने वाले समय के लिए एक पीढ़ी तैयार की है। यह जो निसर्ग का सौंदर्य है, चाहे नाटक हो, गायन हो, नृत्य हो इसे आप एक नई संस्कृति के रूप में जतन कर रहे हो। पहले बच्चे खुले मैदान में खेलते हुए सब कुछ सीखते थे चाहे वह मित्रता हो, बंधुता हो, शेयरिंग हो, एक पल रूठना दूसरे पल मनाना हो यह सब मैदानों में सीखा जाता था। जिससे बच्चों में उनका आत्मविश्वास और आगे आने वाले जीवन की परेशानी, कठिनाईयों को सीखने को मिलता था। एक दूसरे से कैसा व्यवहार करना है मैदानी खेलों से सीखा जाता था। आजकल, मोबाइल टीवी से यह सब देख जरूर सकते हैं परंतु, किसी भी कला गुणों को सिखने वाले बच्चे आगे जीवन में उन्नति करते ही हैं। इसीलिए, पालक वर्ग बच्चों के इन कला गुणों के साथ-साथ संस्कृति, समाज और देश को आदर्श बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह विचार धर्मेंद्र पाटिल ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच रखा।
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का नवोदित प्रतिभाओं को समर्पित उपक्रम 'उभरते सितारे' का आयोजन हिंदी मोर भवन के उत्कर्ष हॉल में किया गया। कार्यक्रम का विषय 'त्योहारों का महत्व' पर आधारित शिक्षाप्रद, ज्ञानवर्धक और संगीतमय प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप मे नागपुर महानगर पालिका से सेवानिवृत्ति झोनल आफिसर धर्मेंद्र पंढरी पाटिल जी उपस्थित थे। इनका सम्मान संयोजक युवराज चौधरी ने स्वागत वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया।
तत्पश्चात, गीत संगीत से बच्चों की प्रस्तुतियां सराहनीय रही। जिसमें, गार्गी गायकवाड़ ने चंद्रमुखी जैसे मेडले पर प्रभावशाली नृत्य कर सबका दिल जीत लिया। आदित्य मिंज ने 'बड़े अच्छे लगते हैं', 'रुक जाना नहीं', राम बागल ने 'तेरी दीवानी', 'तू ही रे', भव्या अरोरा ने 'अपने पिया कि मैं तो', 'ऐ जाने जा', रामकुमार गोनेकर ने 'यह खामोशियां', गार्गी गायकवाड़ ने 'एक तेरा साथ' एवं आदित्य मिंज और भव्या अरोरा ने मिलकर 'देखा एक ख्वाब' गीत गाकर समां बांध दिया।
बच्चों की प्रस्तुतियों को उनके अभिभावकों के साथ-साथ मीनाक्षी केसरवानी, गीता सुरेश मिंज, संदीप वानखेडे, स्वाति गायकवाड, छाया मोडक, वैशाली मदारे, वेदप्रकाश अरोरा, जयंत सोनट्टके, निलरत्न साखरकर, प्रीति अभिजीत बागल आदि ने बहुत सराहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रशांत शंभरकर ने सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन एवं उपस्थित सभी दर्शकों, कलाकारों और बच्चों का आभार संयोजक युवराज चौधरी ने अपने शब्दों में व्यक्त किया ।


