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रामकृष्ण मिशन का इतिहास बड़ा गौरवशाली है : संदीप अग्रवाल


नागपुर। मैं संदीप बी जे अग्रवाल, हाल ही में मुझे रामकृष्ण मिशन, नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वहाँ पहुँचने पर रामकृष्ण मिशन के गौरवशाली इतिहास, उसकी परंपराओं तथा समाजसेवा के व्यापक कार्यों के विषय में विस्तृत एवं प्रेरणादायी जानकारी प्राप्त हुई।


नागपुर के धंतोली क्षेत्र में स्थित रामकृष्ण मठ द्वारा जनकल्याण के अनेक महत्वपूर्ण कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। रामकृष्ण मिशन के माध्यम से वहाँ एक सुव्यवस्थित पुस्तकालय (लाइब्रेरी), निःशुल्क/नाममात्र शुल्क पर चलने वाली डिस्पेंसरी तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त फिजियोथेरेपी सेंटर संचालित किया जा रहा है, जिससे समाज के जरूरतमंद वर्ग को अत्यंत लाभ प्राप्त हो रहा है।

इस दौरान सबसे अधिक प्रेरणादायक और रोचक जानकारी यह प्राप्त हुई कि रामकृष्ण मिशन द्वारा एक आदर्श छात्रावास भी संचालित किया जा रहा है। इस छात्रावास में ग्रामीण क्षेत्रों के आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का चयन किया जाता है। इन बच्चों को छात्रावास में रहकर शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, संस्कृति, अनुशासन और नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जाती है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके। यह समस्त सुविधाएँ अत्यंत नाममात्र शुल्क पर उपलब्ध कराई जाती हैं।

इस विषय में चर्चा करते हुए स्वामी महाबलानंदजी ने बताया कि इस छात्रावास में रहकर शिक्षा प्राप्त करने वाले अनेक विद्यार्थी आज देश के विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत होकर राष्ट्रसेवा कर रहे हैं। यह समस्त सेवा कार्य विगत कई वर्षों से दानदाताओं के सहयोग से निरंतर संचालित है, जो मानवसेवा के प्रति रामकृष्ण मिशन की निष्ठा को दर्शाता है।

कार्यक्रम के दौरान मुझे छात्रावास में निवासरत विद्यार्थियों से विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक संवाद करने का अवसर भी प्राप्त हुआ। मैंने उनकी दिनचर्या, शैक्षणिक गतिविधियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा व्यक्तित्व विकास से जुड़ी जानकारियाँ लीं, जो अत्यंत प्रेरणादायी रहीं।

इस अवसर पर स्वामी महाबलानंदजी ने मुझे स्नेहपूर्वक आशीर्वाद प्रदान किया एवं मेरा सम्मान किया। रामकृष्ण मठ में प्रवेश करते ही ऐसा अनुभव हुआ मानो पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है तो वही स्थान है। वहाँ मन को अपार शांति की अनुभूति होती है। सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण उस परिसर का वातावरण अत्यंत दिव्य एवं आत्मिक शांति प्रदान करने वाला है, जहाँ एक विशेष प्रकार की आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

इस कार्यक्रम में मेरे साथ श्री शशिकांत सिंघानिया एवं श्री गीतेश अग्रवाल भी उपस्थित थे। साथ ही मैंने अपने पुत्र सार्थक को भी इस अवसर पर साथ ले जाना उचित समझा, ताकि उसे भी बचपन से ही संस्कारों, सेवा भावना एवं आध्यात्मिक मूल्यों का ज्ञान प्राप्त हो सके।

स्वामी महाबलानंद जी से भेंट कर मन अत्यंत प्रसन्न एवं भावविभोर हो गया। अंत में मैं आप सभी से विनम्र निवेदन करता हूँ कि रामकृष्ण मिशन द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं से अधिक से अधिक लोग जुड़ें और मानवसेवा के इस पवित्र कार्य में अपना सहयोग प्रदान करें।
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