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अंकतालिका के अंकों से जीवन की गुणवत्ता अधिक महत्वपूर्ण : बाल कुलकर्णी


देवली (पें) स्थित आदिवासी आश्रमशाला और गोपीकिसन बंग विद्यालय के दसवीं के छात्रों का विदाई समारोह उत्साहपूर्वक संपन्न

हिंगणा। आने वाला समय संवाद कौशल का है और जिनके पास प्रभावी ढंग से बोलने की कला होगी, वही 21वीं सदी की इस प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ सकेंगे। इसलिए, यदि अंकतालिका में दो अंक कम भी हों तो चलेगा, लेकिन छात्रों को जीवन की गुणवत्ता में पीछे नहीं रहना चाहिए। आज संस्कारक्षम पीढ़ी निर्माण करने की जिम्मेदारी शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों के कंधों पर है; यदि इसे सही ढंग से निभाया गया, तो एक अच्छे समाज का निर्माण निश्चित रूप से होगा। आज के गलाकाट प्रतिस्पर्धा के युग में शिक्षा 'जान लेने वाली' नहीं बल्कि 'जीवन देने वाली' होनी चाहिए। यह प्रतिपादन वरिष्ठ संपादक तथा सुप्रसिद्ध वक्ता बाल कुलकर्णी ने किया।

वे संत गमाजी महाराज शिक्षण संस्था द्वारा संचालित अनुदानित आदिवासी आश्रमशाला और स्वर्गीय गोपीकिशन बंग विद्यालय, देवली (पेंढरी) के कक्षा दसवीं के छात्रों के विदाई समारोह में मुख्य मार्गदर्शक के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य के पूर्व मंत्री तथा संस्था के अध्यक्ष रमेशचंद्र बंग ने की। इस अवसर पर मंच पर संस्था के कोषाध्यक्ष महेश बंग, केंद्र प्रमुख एकनाथ ढोरे, सरपंच बबिताताई चिखलखुंदे, कृषि उपज मंडी समिति के निदेशक विठ्ठलराव घोंगडे, उपसरपंच विकास इवनाते, देवाजी कोडापे, संदीप चलाख, वसंतराव वैद्य, नेहरू विद्यालय के प्रधानाध्यापक शशिकांत मोहिते, गोपीकिसन बंग विद्यालय के प्रधानाध्यापक देवेंद्र फटिंग, आश्रमशाला के प्रधानाध्यापक महेश चौधरी, माध्यमिक प्रधानाध्यापिका सुप्रिया तुपेकर आदि गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस अवसर पर बाल कुलकर्णी ने आगे कहा कि छात्रों को केवल इसलिए पढ़ाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि कोई उनसे कह रहा है, बल्कि खुद को सिद्ध करने के लिए पढ़ाई की ओर मुड़ना चाहिए। अपने अध्यक्षीय भाषण में रमेशचंद्र बंग ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि छात्र अपनी प्रगति के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व और कार्यों से समाज एवं देश का नाम कैसे रोशन हो, इस पर विशेष ध्यान दें।

कार्यक्रम की शुरुआत में छात्रों ने मनमोहक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को आदिवासी संस्कृति के दर्शन कराए। इस दौरान कक्षा नौवीं के छात्रों ने दसवीं के छात्रों को विदाई दी, वहीं दसवीं के छात्रों ने स्कूल द्वारा दिए गए संस्कारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए अपनी भावनाएं साझा कीं। कार्यक्रम का प्रस्तावना प्रधानाध्यापक महेश चौधरी ने रखी, मंच संचालन कल्पना गोरे ने किया और आभार प्रदर्शन प्रधानाध्यापिका सुप्रिया तुपेकर ने किया। इस समारोह में शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और छात्र बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
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