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नैतिकता साहित्य के सरोकारों का दर्पण है : डॉ. सागर खादीवाला

                          

नागपुर। 'साहित्य में नैतिकता' पर चर्चा करने हेतु नगर के ख्यातिनाम साहित्य विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन नागपुर के सभा कक्ष में मंच संचालक और शायर डॉ सागर खादीवाला की अध्यक्षता में नागपुर वैचारिक मंच द्वारा आयोजित किया गया। डॉ. सागर खादीवाला ने कहा आज नैतिकता हर क्षेत्र में गिर रही है, आज साहित्यकार गलत हो रहे कार्यों पर विरोध का न तो स्वर उठा रहा है और न लिख रहा है।

वरिष्ठ साहित्यकारा इंदिरा किसलय ने कहा रिश्ते, व्यक्तिमत्व, व्यवहार अब संबंध देख टीका करते हैं, साहित्य में मौलिकता और लेखन में गहराई ही नहीं रह गई है। हिंदी साहित्य की गहरी पैठ रखनेवाली मधु सिंघी का कहना था नैतिकता व्यवहार में लाकर प्राणी जगत के हित में सोचे और साहित्यकार को स्वयं पर अनुशासन रखना होगा। 

संयोजक डॉ राजेंद्र पटोरिया ने कहा आज माध्यम के दुरुपयोग से लेकर राजनैतिक व्यवस्था तक आदर्श साहित्य पहले सा नहीं लिखा जा रहा बल्कि आज विरोध देशद्रोह हो गया है। कवि और वकील ओ डी जैन का कहना था आज कल नैतिकता न्यायलय में भी नहीं रह गई है, साहित्यकार सदा समय काल की परिस्थितियों पर लेखक निर्भर रहा है।

पत्रकार और पॉवर ऑफ वन मैगजीन के संपादक नीरज श्रीवास्तव ने कहा साहित्यकार ने स्वयं को समय काल के साथ हमेशा स्वयं को बदला। साहित्यकार , कलाकार  चित्रकार को उनके चरित्र ने न खोज उनके इल्म में खोज स्थापित सांस्कृतिक मापदंडों को क्रॉस न करें। संपादक, पत्रकार कृष्ण नागपाल ने पुराने साहित्यकारों का जिक्र कर कहा आज के कलमकारों को भी उनसा यथार्थ परोसना होगा। 

मंचीय कवि सुदर्शन चक्रधर का कहना था आज हर क्षेत्र में नैतिकता 25 प्रतिशत ही रह गई जिस से साहित्य का पतन हुआ। दिवान मेरा द्विमासिक पत्रिका के संपादक लेखक नरेंद्र परिहार का मत था साहित्य नैतिकता का दर्पण होना चाहिए तब सत्यम, शिवम, सुंदरम के आदर्श को स्थापित कर सकते हैं क्योंकि साहित्य मनोरंजन या सौंदर्य का माध्यम न रह नैतिकता का गहना है। अगला विषय 8/3/26 को दोपहर समय 2 से 4 बजे *परस्पर संवाद* पर आयोजित होगा जिसमें नगर के बहुभाषी साहित्यकार सहभागी होंगे।
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