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छात्र, युवा शास्त्र ग्रंथ और साहित्य का का अध्ययन करेंगे तो आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और संस्कारीत भी होंगे : डॉ. प्रेमलता तिवारी


नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन, हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी, नागपुर में ‘चौपाल’ उपक्रम के अंतर्गत दिनांक 9 फरवरी 2026 को ‘गिरते आत्मविश्वास विश्वास में युवा/छात्र उठाते हैं, घातक कदम’ इस शीर्षक के अंतर्गत संयोजक विजय तिवारी, सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे, इनके मार्गदर्शन में चर्चा का आयोजन किया गया।

इस आयोजन में डॉ.  प्रेमलता तिवारी पूर्व प्रधानाध्यापिका व अध्यक्ष, नारायण शक्ति फाउंडेशन तथा समाज सेविका, वैसे ही डॉ. बच्चू पांडे पूर्व प्राध्यापक व अध्यक्ष, हिंदी भाषिय ब्राह्मण विकास संघ, नागपुर व समाज सेवक तथा श्रीमती नीता अमरीश दुबे, संचालिका व मुख्य अध्यापिका, डॉल्फिन पब्लिक स्कूल, नागपुर उपस्थित थे।

कार्यक्रम की शुरुआत माता सरस्वती के वंदना के साथ की गई। सर्वप्रथम मदनगोपाल वाजपेई ने अपने जीवन के अनुभव के अनुसार अन्य उदाहरण के साथ युवाओं में गिरते आत्मविश्वास पर बहुत ही सुंदर उद्बोधन किया। उन्होंने ऐसे आधुनिक उदाहरण बताएं जिसमें उन्होंने सचिन तेंदुलकर क्रिकेट खिलाड़ी सदी के महानायक, अमिताभ बच्चन ऐसे उदाहरण दिए।

डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी में अपने कविता की शैली में बहुत ही संक्षिप्त में आज के परिवेश में प्रचलित शिक्षा पद्धति, माता-पिता के व्यस्त जीवन में बच्चों पर ध्यान ना देना व इसी प्रकार शिक्षक वर्ग भी कुछ हद तक अपने कर्तव्य पालन का निर्वहन ना कर पाने के परिणाम स्वरूप आज के युवाओं में व छात्रों में आत्मविश्वास की कमी देखी जाती है, ऐसा उन्होंने अपने व्यक्तव्य में कहा। 

रमेश मौदेकर ने भी आज के युवाओं कि उद्दंडता के अनेक प्रसंग बताएं व उन्होंने ऐसे युवाओं को संस्कृत करने के अनेक समाधान बताएं। लक्ष्मी नारायण केसर ने युवाओं में गिरते विश्वास के लिए पालक, वर्तमान परिवेश व शिक्षा पद्धति को जिम्मेदार बताते हुए उन्होंने इसमें आमूल परिवर्तन करने की सिफारिश की।

धीरज दुबे ने बहुत ही संक्षिप्त में आज युवाओं में देखे जा रहे है व आधुनिक जीवन शैली में उनके बर्बाद होते हैं  भविष्य का कारण मोबाइल ऑनलाइन गेम मित्रता व अनावश्यक स्वतंत्रता को जिम्मेदार ठहराया, और उन्होंने इसके लिए शिक्षक पालक और वर्तमान में होने वाले अनावश्यक देर रात तक चलने वाली पार्टीया आधुनिक जीवन शैली की जवाबदारी है, ऐसा उन्होंने बताया। 

शत्रुघ्न तिवारी ने भी वर्तमान में युवाओं में, युवाओं के व्यवहार में हो रहे परिवर्तन व उनके परिणाम के बारे में बताते हुए, भविष्य बर्बाद करने के अनेक उदाहरण उन्होंने दिए। अंत में एडवोकेट जगत वाजपेई अपने परंपरा के अनुसार विशेष तरीके से अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय होने वाले परिवर्तन, इसका युवाओं पर पड़ते प्रभाव के  परिणाम स्वरूप आज की जीवन शैली में गला काट स्पर्धा, सबसे विशेष होने की मानसिकता, आत्म केंद्रित जीवन, व इनसे होने वाले परिणाम, भविष्य का दृश्य प्रस्तुत किया।

डॉ प्रेमलता तिवारी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि वे युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए, उनमें आत्मविश्वास जगाने के लिए नारायण शक्ति फाउंडेशन के माध्यम से अनेक काउंसलिंग के कार्यक्रम करती है। और इसी प्रकार वे युवाओं को बताती है कि, आपके जीवन में यदि प्लान "ए" सफल नहीं हुआ, तो आप प्लान "बी" पर अमल कर सकते हैं, इस प्रकार से हमारे जीवन में सफलता के अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं, इस पर अमल किया जा सकता है।  अपने अध्यापन जीवन के व अनेक अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम का सफल मंच संचालन संयोजक श्री विजय तिवारी वी सहसंयोजक हेमंत कुमार पांडे ने आपसे सहयोग से किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में सर्व श्री अमरीश दुबे, प्रतीक चामबोले, सर्व श्रीमती नेहा धनंज अपराजिता, कृष्णा कपूर, नंदा वजीर, सुनीता दुबे, सर्वश्री कार्तिक भगत, आर ए वजीर, गणेश सिंह ठाकुर, अमेय पुराणिक, आकाश कुंभारे, शत्रुघ्न तिवारी, रमापति चौबे, वैभव शर्मा, खुर्शीद अली, मोहम्मद सईद, लक्ष्मीनारायण केस, रोशन कुमार सिंह इत्यादि ने अपना अमूल्य योगदान दिया।
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