प्राणायाम, योगा करने से बच्चों में एंग्जायटी कम होती है : डॉ. कोमल वासनिक
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उभरते सितारे मे 'आशाओं के दीप'
नागपुर। बच्चों के जन्म से लेकर 3 साल तक उनका 18 परसेंट डेवलपमेंट हो जाता है। धीरे- धीरे उनमें सोचने, समझने की क्षमता भी विकसित होती है। इसीलिए उनमें कला और साहित्य के प्रति आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार हेल्दी इंसान वह है, जो फिजिकल, मेंटल और सोशल रूप से सक्षम हो। बच्चों में उनकी उम्र के भी अलग प्रॉब्लम्स होते हैं। इसीलिए, उन्हें भी प्राणायाम, योगा सीखाना चाहिए। इससे बच्चों में एंग्जायटी कम होती है। यह विचार डॉ. कोमल वासनिक ने बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच रखें। और उन्हें चिकित्सा की जानकारी भी दी। इस अवसर पर विशेष रूप से पद्मा इंटरनेशनल स्कूल की संचालिका और मुख्याध्यापिका नीरजा प्रशांत शंभरकर प्रमुखता से उपस्थित थी।
विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन का नवोदित प्रतिभाओं को समर्पित उपक्रम 'उभरते सितारे' का आयोजन हिंदी मोर भवन के उत्कर्ष हॉल में किया गया। कार्यक्रम का विषय 'आशाओं के दीप' पर आधारित शिक्षाप्रद, ज्ञानवर्धक और संगीतमय प्रस्तुतियों से भरा रहा। कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप मे एम.डी., पीएसएम. डॉ. कोमल पुरुषोत्तम वासनिक जी उपस्थित थीं। इनका सम्मान संयोजक युवराज चौधरी ने स्वागत वस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर किया।
तत्पश्चात, गीत संगीत से बच्चों की प्रस्तुतियां सराहनीय रही। जिसमें, आदिप्ता नंदेश्वर ने कविता सुनाई। आदित् मिंज ने अपने गीतों से दिल जीत लिया। पदमा इंटरनेशनल स्कूल के बच्चों में से माहिरा खोबरागड़े, सानवी लोहे, विहा अडे, प्रिशा कांबळे, अदिप्ता नंदेश्वर, प्रियंका महतो आदि बच्चों ने बहुत सुंदर नृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
बच्चों की प्रस्तुतियों को उनके अभिभावकों के साथ-साथ प्रियंका बिसेन खोबरागड़े, आशा भगत, गीता सुरेश मिंज, रेखा पुरुषोत्तम वासनिक, रत्नमाला निकोडे, देवयानी आड़े, विजय भगत, वैशाली मदारे, संतोष धुर्वे आदि ने बहुत सराहा। कार्यक्रम को सफल बनाने में दीपक भावे ने सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन एवं, उपस्थित सभी दर्शकों, कलाकारों और बच्चों का आभार संयोजक युवराज चौधरी ने अपने शब्दों में व्यक्त किया ।


