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नागपुर में 'एआई युग में ग्रंथालय प्रबंधन और इसकी चुनौतियों' पर प्रथम एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न


नागपुर। 'एआई युग में ग्रंथालय प्रबंधन और इसकी चुनौतियां' विषय पर प्रथम एक दिवसीय कार्यशाला 14 फरवरी को इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय और शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय नागपुर के संयुक्त तत्वावधान में इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय के लेक्चर हॉल में उत्साहपूर्वक संपन्न हुई।

कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि के रूप में डॉ. राज गजभिये, अतिरिक्त सहसंचालक, वैद्यकीय शिक्षण और अधिष्ठाता शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय नागपुर, डॉ. रवी चव्हाण, अधिष्ठाता, इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय नागपुर और डॉ. भावना सोनवणे, ग्रंथालय समिति अध्यक्ष और विभागप्रमुख, क्ष-किरण विभाग, इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय, नागपुर उपस्थित थे।

प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ. सीमा व्यास (पूर्व ग्रंथपाल, शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय नागपुर) और श्री. संजय केमकर (पूर्व ग्रंथपाल, शासकीय दंत महाविद्यालय, मुंबई) और डॉ. मंजू दुबे, ग्रंथपाल और सहयोगी प्राध्यापक, आर. एस. मुंडले धरमपेठ कॉलेज, नागपुर उपस्थित थीं। कार्यक्रम की शुरुआत द्वीप प्रज्वलित कर और ग्रंथालय शास्त्र के जनक डॉ. एस. आर. रंगनाथन और विद्येची देवी सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पण कर की गई।

डॉ. मंजू दुबे ने एआई तंत्रज्ञान का प्रभावी ग्रंथपालन पद्धती के लिए कैसे उपयोग किया जा सकता है, वैद्यकीय क्षेत्र में एआई के युग में ग्रंथपालों की भूमिका क्या होनी चाहिए, और विद्यार्थियों और शिक्षकों को अचूक और विश्वासार्ह जानकारी कैसे प्रदान की जा सकती है, इस पर विस्तृत मार्गदर्शन किया।
डॉ. सीमा व्यास और संजय केमकर ने ग्रंथालय में पुस्तकों और नियतकालिकों की खरीद प्रक्रिया पर विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला के अंतिम सत्र में ग्रंथालय कर्मचारियों को दैनिक काम में आने वाली समस्याओं और अडचनों पर चर्चा सत्र आयोजित किया गया। उपस्थित ग्रंथालय कर्मचारियों ने अपने प्रश्न पूछे। आयोजन समिति ने आश्वासन दिया कि ये प्रश्न आयुक्त, वैद्यकीय शिक्षण और संशोधन, मुंबई को भेजे जाएंगे।
कार्यशाला को सफल बनाने के लिए डॉ. रवींद्र सोंडे, श्रीमती प्रिया गोडघाटे, श्रीमती अंजिता गजघाटे, रंजीत कांबळे, गोपाल राठोड, मंगेश कांबळे, विजय बोंगारे, अजय गीते, और प्रणोती राखुंडे ने विशेष परिश्रम किया।
कार्यक्रम का सूत्रसंचालन श्रीमती शितल सहारे और श्रीमती प्रियंका चव्हाण ने किया। ग्रंथपाल और कार्यशाला आयोजक नितीन गजघाटे ने आभार माना।
इस ऐतिहासिक प्रथम कार्यशाला में महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से ग्रंथपाल और ग्रंथालय कर्मचारियों की विक्रमी उपस्थिति रही।
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