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मेजर जकाते ने सेवा का आदर्श रखा : सतीजा


कलामंच की श्रध्दांजलि                      
             

नागपुर। अपनी जमीन, जायदाद बेचकर समाज पर न्योछावर कर वृध्दाश्रम में जीवनयापन कर रहे 89 वर्षीय मेजर हेमंत जकाते हमारे बीच नहीं रहे। यहां तक कि जाते-जाते नेत्रदान और देह राष्ट्रार्पण का संकल्प भी किया जिसे हमने पूरा किया। उल्लेखनीय है कि 1962,1965 और 1971के युध्द में सक्रिय योगदान देकर 9 मैडल पाने के बाद 6 दिसम्बर 1982 को सेवानिवृत्त हुए।कलामंच के संस्थापक नरेंद्र सतीजा ने बताया कि 1998 में जकाते दंपति पंचवटी वृध्दाश्रम आकर रहने लगे।उन्होंने कहा कि जकाते दंपति ने सेवा का आदर्श रखा ।इन्होने संतरानगरी को बहुत कुछ दिया है। 

दान देकर विभिन्न क्षेत्रों की सामाजिक संस्थाओं की सहायता की। इनमें श्रध्दानंद अनाथालय, आशादीप,मातृ सेवा संघ  मतिमंद विद्यालय, विकलांग संस्था, मुडे विद्यालय, भानुताई गडकरी संस्था आदि का समावेश है।विशेष रूप से अपनी पेंशन के पैसों से दो शहीद स्मारक भी बनाए। एक काटन मार्केट में और दूसरा वर्धा रोड पर स्थित राजीव गांधी चौक पर। उमरेड रोड पर कलमना गांव स्थित प्रहारगढ के निर्माण में समुचित योगदान रहा है।  हिन्दी और मराठी साहित्य के क्षेत्र में योगदान देते हुए जकाते दंपति की 28 पुस्तकों का प्रकाशन किया गया है। इनमें से अधिकांश का प्रकाशन और लोकार्पण कलामंच द्वारा किया गया है।उन्होंने अनेकों काम कलामंच के साथ किए।हाल ही में जकाते सेवा अभियान का शुभारंभ कलामंच के तत्वावधान में स्नेहांचल के पावन परिसर पर किया गया ।कलामंच परिवार ने मेजर जकाते को आदरांजलि दी हैंl
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