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साहित्यिकी में किताबें बोलती है का सफल आयोजन


नागपुर। विदर्भ हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपक्रम साहित्यिकी के अंतर्गत किताबें बोलती है का  सफल आयोजन किया गया।

छिंदवाड़ा से पधारीं प्रमुख अतिथि डॉ दीपशिखा सागर का स्नेहिल स्वागत स्मृति चिन्ह और स्वागत वस्त्र से किया गया।

उपस्थित सुधिजनों साहित्यकारों ने महनीय लेखकों कवियों की - अपनी मनपसंद किताबों के महत्वपूर्ण अंश सुनाकर आयोजन को सार्थकता दी। तन्हा नागपुरी ने अमृता प्रीतम की पिंजर से पूरो की कथा सुनाई। अमिता शाह ने चाणक्य नीति से सत्य के बिना सब मिथ्या है बढ़िया बातें कही। माधुरी मिश्रा मधु ने पद्मभूषण पद्मश्री नीरज की फिर दीप जलेगा को बड़ी सुंदरता से प्रस्तुत किया। लीलाधर सिन्हा ने रामधारी सिंह दिनकर की रचना प्रकृति का आंगन पढी। दीपक गुप्ता ने गुनाहों का देवता अज्ञेय की सुधा- चंदर को गुना। कामिनी शुक्ला ने हेमलता मिश्र मानवी की सप्तपर्णी से पिता रचना सुनाई। जयप्रकाश सूर्यवंशी ने गुरु का मनोगत किरण की संवेदनायें सुनाई। देवयानी ने रामकृष्ण परमहंस से निराला का अनुवादित कथ्य सुना कर अभिभूत किया। शारदा मिश्र ने मधु शुक्ला की मार्मिक कथा खिचड़ी से अंश सुनाकर कक्ष को भावविभोर किया। सुषमा शर्मा ने मुंशी प्रेमचंद की कथा परीक्षा बढ़िया भावपूर्ण तरीके से सुनाई। माधुरी राऊलकर ने पसंदीदा कवि की उत्कृष्ट कविता सुनाकर मन मोह लिया। अनीता आगरकर ने डाॅ मानसिंह की साहित्य वाटिका से उजडा़ खेत कविता पढी़। माया शर्मा ने मधु सिंघी के मधु काव्य से बहुत अच्छी रचना सुनाई। रमेश मौंदेकर ने डाॅ. विजय शर्मा की बढ़िया रचना दी। मंजू कारेमोरे ने धर्मवीर भारती की गुनाहों का देवता से अंश पढे। शादाब अंजुम ने अतिथि दीपशिखा के गजल संग्रह काश-काश से खूबसूरत गजल सुनाई। संचालन करते हुये मानवी ने वंदना सहाय की बूँद बूँद प्रतिबिंब से प्रभावशाली हाइकु पढे़। अतिथि अध्यक्ष डाॅ. दीपशिखा ने आयोजन की भूरि- भूरि सराहना और अन्य रचनाकारों की रचनाएं पढ़ने वाले रचनाधर्मियों की सार्थक समीक्षा की। इक्कीस पुस्तकों की महत रचनाकार अतिथि ने रसिकजनों के संमुख अपनी भी रचनाएं सुनाई। समस्त सुधिजनों का आभार व्यक्त करते हुये आयोजन का समापन हुआ।

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