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आयुर्वेद और योग पर विश्वव्यापी चर्चा हो रही है : डॉ. गोविंद प्रसाद उपाध्याय


नागपुर। हमारे देश के प्रधानमंत्री से लेकर विश्व के अन्य नेता जहां भी जाते हैं, आयुर्वेद और योग की चर्चा किए बिना नहीं रहते। आयुर्वेद में संस्कृत भाषा का महत्व बढ़ा है, आयुर्वेद के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। डॉ. गोविंद प्रसाद उपाध्याय आयुर्वेद एक समागम के तृतीय सत्र और समापन अवसर पर बोल रहे थे। हम आपको बता दें कि भाऊसाहेब मुळक आयुर्वेद कॉलेज अँड रिसर्च हॉस्पिटल, बुट्टीबोरी, आयुष मंत्रालय, नेशनल कमीशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन, महाराष्ट्र स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यार्थी एवं युवा संगठन के माध्यम से तीन दिवसीय परिषद का आयोजन रविवार को किया गया था। 

इस अवसर पर डॉ. नारायण जाधव, डॉ. गोविंद प्रसाद, डॉ. स्नेहा चव्हाण, डॉ. कडू मैम, डॉ. खोंड, डॉ. जोगड, डॉ. रमण बेल्गे, डॉ. जी.पी. उपाध्याय, मालेगांवकर मैम, डॉ. अभिजित मुंशी, डॉ. आर. चांगानी, डॉ. विवास्तव हेवालकर, डॉ. श्री प्रसाद एमके उपस्थित थे। डॉ. नारायण जाधव ने बताया कि आयुर्वेद में केवल डॉक्टर बनने से ही नहीं, बल्कि निरंतर अभ्यास से सफलता मिलती है। आयुर्वेद के मूलभूत विज्ञान से लेकर पीएचडी तक।
श्रीलंका से आए डॉ. कौमादी करुंगोडा ने कहा कि आयुर्वेद महिलाओं के स्वास्थ्य समस्याओं पर प्रभावी उपाय है। डॉ. अर्चना देशपांडे ने बताया कि आयुर्वेद में उद्यमी बनने का भी अवसर है। आयुर्वेद में विश्व का पहला पेटेंट हमारे द्वारा प्राप्त हुआ है। सबसे पहले, हमने दवाइयां बनाकर डॉक्टरों तक पहुंचाने का कार्य किया है।

वैश्विक पर्यटन में आयुर्वेद के महत्व पर बोलते हुए डॉ. प्रशांत तिवारी ने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से पर्यटन से किसी भी देश का वैध प्रवेश बनाना आवश्यक है। देश ने लगभग 21 देशों के साथ समझौता किया है। आयुर्वेद पर्यटन के संदर्भ में नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार आदि भारत के साथ यह व्यवसाय शुरू किया जा सकता है। आयुर्वेद से पर्यटन का दिन अच्छा होता है, इसका उपयोग निरोगी रहने के लिए आवश्यक है। कर ने कहा कि अभ्यास के साथ आयुर्वेद उद्यमियों को अवसर देता है। लेकिन जोखिम कारकों के बिना यह संभव नहीं। समापन कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों ने धन्वंतरी पूजा का मार्गदर्शन किया। डॉ. मधुसूदन गुप्ता ने सभी कार्य समितियों और स्वयंसेवकों की सराहना की और कहा कि उनके बिना यह तीन दिवसीय परिषद को सफल बनाना कठिन होता। अंत में, शिव धनकंता हॉस्पिटल की ओर से टॉपर्स को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
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