गजल संग्रह 'हमसफर जैसे दिन' का लोकार्पण
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नागपुर। सुबह की तरह सुहानी है, मेरी ग़ज़ल, परिन्दों का दानापानी है, मेरी ग़ज़ल, जीकर देखा जिन्दगी, तुझे आजमाया, तेरी आंखों का पानी है मेरी ग़ज़ल। ग़ज़ल की यह पंक्तियाँ है माधुरी राऊलकर की। विदर्भ हिन्दी साहित्य सभागृह में सम्मेलन के गजलकारा माधुरी राऊलकर के 'प्रक्षेप' प्रकाशन से प्रकाशित 'हमसफर जैसे दिन' ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. सागर खादीवाला की मध्यक्षता में सम्पन्न हुये इस कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा, कुलाधिपति, दत्ता मेघे इंस्टिटयूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड और प्रसिध्द किडनी रोग तज्ञ डॉ. शिवनारायण आचार्य थे।
कार्यक्रम की सुरूआत मीरा जोगलेकर की सरस्वती वंदना से हुई। माधुरी ने अपने मनोगत में कहा कि यहां की साहित्यिक पृष्ठभूमि साहित्यकारों के लिये अनुकूल है जहां वे अपनी साहित्यिक गतिविधियों को जारी रखते है। और उन्होंने अपनी दो ग़ज़ले प्रस्तुत की 'हमसफर जैसे दिन' यह उनका 21 (२१) वा गजल संग्रह है। डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा ने कहा कि ग़ज़ल लिखना आसान नहीं लेकिन यह काम माधुरी ने तन्यमता से किया है। गजल तल उन्मुक्त विचरण करती है और दिलों को छू लेती है। डॉ. शिवनारायण आचार्य ने उनकी माँ पर लिखी गजल पढी। आ घनी रात में दोपहर कर के माँ, जीती है दिल को पत्थर कर के माँ। बस एक माँ का रिश्ता कायम रखने, मील माती मीलों मिल सफर कर के माँ।
उन्होंने मार्मिकता से इस गजल का विवेचन किया और कहा कि इन्होने इतने सारे विषयपर ग़ज़ले लिखी जो सादगीपूर्ण है। डॉ. सागर खादीवाला ने कहा कि इनकी ग़ज़लों का लहजा सालो पूर्व जैसा था आज भी वैसा है सहज सरलता से परिपूर्ण जिसे समझ में कोई कठिनाई नहीं होती इसलिये ये सीधे श्रोताओं के दिल तक पहुंचती है। अतिथियों द्वारा माधुरी राऊलकर का शॉल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ से सत्कार किया गया। संचालन प्रा. आदेश जैन और आभार अनिल मालोकर ने किया। संतोष बादल कार्यक्रम में डॉ. सुवास राऊलकर, नरेन्ह परिहार, डॉ. राम मुले, डॉ. बालकृष्ण महाजन, प्रा. आनंद देशकर, मनीष सोनी, अनिल मालोकर, अविनाश बागडे, टीकाराम साहू अजय पांडे अशोक डोळस, अरूण खरे, इन्दिरा किसलय, रंजना श्रीवास्तव, सुजाता दुबे, रूबी दास, प्रभा मेहता, पूनम मिश्रा, नंदिता सोनी, नीलम शुक्ला, देवयानी बॅनर्जी, सुरेखा खरे, पुनम तिवारी, अमिता शाह, हेमलता मिश्र, पुष्पा पांडे, सुविधी जयस्वाल, नीता वर्मा, सुषमा शर्मा, कल्पना शुक्ला इत्यादि साहित्यिक उपस्थित थे।

