वाशिम जिले के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के नवीकरण पाठ्यक्रम का समापन समारोह संपन्न
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नागपुर/हैदराबाद। केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र द्वारा महाराष्ट्र राज्य के वाशिम जिले के हिंदी अध्यापकों के प्रशिक्षण के लिए 494वें नवीकरण पाठ्यक्रम’ का आयोजन दिनांक 16.03.2026 से 28.03.2026 तक किया गया। जिसका समापन समारोह दि. 28.03.2026 को संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में, मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के प्रो. दोड्डा शेषु बाबु उपस्थित रहे।
इस अवसर पर पाठ्यक्रम संयोजक केंद्रीय हिंदी संस्थान, हैदराबाद केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक, डॉ. दीपेश व्यास, डॉ. राजीव कुमार सिंह एवं स्थानीय समाजसेवी बी. शंकर उपस्थित थे। सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। प्रतिभागियों द्वारा संस्थान गीत एवं स्वागत गीत प्रस्तुत करके कार्यक्रम की शुरूआत की गई। इस कार्यक्रम में कुल 26 (महिला-02 पुरुष-24) प्रतिभागियों ने कक्षा में उपस्थित होकर प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अध्यक्षीय वक्तव्य में केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक प्रो. सुनील बाबुराव कुळकर्णी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे अहम है देश में हिंदी भाषा को लेकर बहुत राजनीति हो रही है किंतु हिंदी एक ऐसा माध्यम है जो सभी को एक माला में पिरोकर रख सकती है। एक सच्चा शिक्षक अपने छात्रों के अंदर छिपी हुई प्रतिभाओं को निखारता है और ज्ञान के माध्यम से उनके जीवन के मार्ग को प्रशस्त करता है। इसीलिए गुरु को ईश्वर से भी उच्च स्थान दिया गया है। क्योंकि ईश्वर को प्राप्त करने का मार्ग गुरु ही बताता है।
मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. दोड्डा शेषु बाबु ने कहा कि भारत विविधताओं का देश है। यहाँ बोली जाने वाली भाषाएँ भिन्न-भिन्न हैं किंतु हिंदी सभी को जोड़ने का कार्य करती है। आप जिन बच्चों को तैयार करते हैं उन्हें केवल हम उच्च शिक्षा के माध्यम से पल्लवीत करते हैं। देश के भावी नागरिकों का निर्माण प्राइमरी एवं माध्यमिक शिक्षकों के द्वारा ही किया जाता है, जो आगे चलकर डॉक्टर, इंजिनियर और राजनेता बनकर देश के विकास में अपना योगदान देते हैं।
पाठ्यक्रम संयोजक एवं क्षेत्रीय निदेशक डॉ. फत्ताराम नायक ने कहा कि इस बारह दिन के प्रशिक्षण के दौरान आपने जो भी सीखा है वह अपने विद्यालय जाकर विद्यार्थियों को देंगे तो आपके साथ-साथ उनका भी विकास होगा। क्योंकि अधुरा और अशुद्ध ज्ञान कभी व्यक्ति को सफल नहीं बना सकता। इसीलिए गुरु का कर्तव्य बनता है कि वह अपने शिष्यों को सही मार्ग दिखाए और हम आपसे यही आशा करते हैं कि जो आपने यहाँ सीखा है वह अपके और आपके शिष्यों के जीवन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रखेगा।
इस अवसर पर डॉ. राजीव कुमार ने कहा कि अपनी कक्षाओं में हिंदी अध्यापकों को यह ध्यान देना चाहिए कि वह हिंदी का वातावरण निर्मित कर बोलने में अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग करें। जिससे उनके विद्यार्थियों का बौद्धिक विकास पूर्ण रूप से हो सके। डॉ. दीपेश व्यास ने कहा कि एक शिक्षक जीवनपर्यंत सीखता रहता है आपने यहाँ प्रशिक्षण के दौरान जो सीखा है वह अपने विद्यार्थियों को अवश्य सिखाएँ।
इस कार्यक्रम का संचालन कु. रेखा तुळशिराम करंगे एवं कु. पुजा द. भोयर एवं आभार ज्ञापन प्रशांत महादेव शिंदे द्वारा किया गया। इस पाठ्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने हस्तलिखित पत्रिका ‘’वत्सगुल्म नगरी : वाशिम जिला’’ की रचना की। समापन समारोह के दौरान अतिथियों द्वारा हस्तलिखित पत्रिका का लोकार्पण किया गया। प्रतिभागियों को अतिथियों के द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किए गए। पर-परीक्षण के आधार पर उत्तम अंक प्राप्त छात्रों को विशेष पुरस्कार दिए गए। समाधान अशोक गुडदे को प्रथम पुरस्कार, नरेश विजय चव्हाण को द्वितीय पुरस्कार, गजानन काशिराम चौधरी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए। कु. पुजा दत्तात्रय भोयर एवं कु. रेखा तुळशिराम करंगे को प्रोत्साहन पुरस्कार प्रदान किया गया।
इस पाठ्यक्रम के समापन समारोह में प्रतिभागियों द्वारा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पाठ्यक्रम से संबंधित प्रतिक्रिया प्रतिभागी कुंडलिक निवृत्ती अंभोरे तथा प्रतिवेदन नरेश विजय चव्हाण द्वारा दी गईं। प्रतिभागियों द्वारा सामूहिक नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए संस्थान परिवार का भरपूर सहयोग रहा। अंत में राष्ट्रगान से कार्यक्रम का समापन हुआ।