विकसित भारत में परिवर्तन के आयाम : भाषा, अर्थव्यवस्था, राजनीति और इतिहास का संगम’ विषयक पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
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भगिनी निवेदिता कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) आयोजित किया गया अकादमिक सत्र
नागपुर/नई दिल्ली। भगिनी निवेदिता कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) द्वारा आयोजित ‘विकसित भारत में परिवर्तन के आयाम: भाषा, अर्थव्यवस्था, राजनीति और इतिहास का संगम’ विषयक एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अंतर्गत हिन्दी विभाग द्वारा 'भाषा के विविध रूप और अभिव्यक्तियाँ' विषय पर एक अकादमिक सत्र आयोजित किया गया।
सत्र का शुभारंभ विभाग प्रभारी डॉ. रीता नामदेव द्वारा स्वागत वक्तव्य एवं अतिथियों के सम्मान के साथ हुआ।सत्र की अध्यक्षता प्रो. मंजु मुकुल (हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय) ने की। मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. जय कौशल (सोफिया विश्वविद्यालय, बुल्गारिया) तथा विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. शहाबुद्दीन (गुजरात विश्वविद्यालय) ने ऑनलाइन माध्यम से अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।
मुख्य वक्ता प्रो. जय कौशल ने अपने वक्तव्य में विकसित भारत के निर्माण में भाषा, विशेष रूप से हिंदी, के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि हिंदी आज वैश्विक परिदृश्य में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। विशिष्ट वक्ता डॉ. शहाबुद्दीन ने हिंदी गद्य के विकास में योगदान देने वाले साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी कविता के क्षेत्र में अभी और कार्य की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भाषा आमजन के निकट एवं सहज होनी चाहिए।
अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रो. मंजु मुकुल ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की संवाहक भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाषा व्यक्ति की मनःस्थिति, विचारों एवं दृष्टिकोण को प्रभावित करने की महत्वपूर्ण क्षमता रखती है।
सत्र का संचालन श्री अर्चित सिंह, डॉ. ममता एवं डॉ. सुकेश द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया, जिससे सत्र सुव्यवस्थित, संगठित एवं विचारोत्तेजक बना रहा। इस दौरान नवोदित शोधार्थियों एवं वरिष्ठ विद्वानों के मध्य सार्थक संवाद स्थापित हुआ।
इस सत्र में कुल 22 शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 07 ऑनलाइन तथा 15 ऑफलाइन माध्यम से प्रस्तुत हुए। शोध-पत्रों में साहित्यिक अनुवाद, हिंदी सिनेमा की भाषा, मातृभाषा की भूमिका तथा विभिन्न कवियों के साहित्य में भाषाई प्रयोग जैसे विविध विषयों पर विचार किया गया। प्रस्तुतियों में विविधता के साथ-साथ अनुभवजन्य एवं मानक विश्लेषण पर विशेष बल दिया गया।
सत्र में हिंदी भाषा के साथ-साथ साहित्य, संस्कृति एवं सिनेमा के अंतर्संबंधों पर भी प्रकाश डाला गया। प्रो. गीता कौशिक एवं प्रो. पूनम राठी ने शोध- पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को फीडबैक प्रदान करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं। कार्यक्रम का समापन विभाग प्रभारी डॉ. रीता नामदेव द्वारा औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।
