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स्वर साधना ने मनाया अंतराष्ट्रीय महिला दिवस


नागपुर। जागतिक महिला दिन के उपलक्ष में स्वर साधना म्युझिकल ग्रुप, प्रतापनगर नागपूर की ओर से महिला सशक्तीकरण एवं उनके हुनर को उजागर करने के लिये संगीतमय कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। डॉक्टर हरीभाऊ डोर्लीकर ने इस अवसर पर कहा कि सुप्त गुणो को उजागर करने के लिये सबसे पहले खुद पर विश्वास करना सीखे। फिर दृढनिश्चयी बने, जिंदगी मे आगे बढने के लिये स्मार्ट वर्क सीखे।  

जिंदगी मे पैसा एवं सुख, चैन, शांती और आनंद की कोई सीमा नही रहेंगी इसके लिये शरीर की जगह मन को पहचाने। हमारा मन काफी ही संवेदनशील है, जिस दिन हम यह जान जायेंगे वह दिन हमारे जिंदगी का  बहुत बडा दिन होगा।  महिलाये अपने आप को कमजोर ना समझे वो चाहे तो हर मुश्किल काम आसान कर सकती है, मगर वह सीमित जिंदगी मे सिमट कर रह जाती है! जिंदगी का कडवा सच यह है कि हम मन को इतना कमजोर करते है कि हर आसान काम मुश्किल समझते है, इसलिये कमजोर हो जाते है। किसी भी क्षेत्र मे महिलाये आगे बढ़ती है तो पुरा समाज उन्नती की नई मिसाल कायम कर सकता है। उन्होंने सभी गायक कलाकार को शुभकामनाएं दी।

संगीत प्रेमी लोगों के लिये गाने तराने यह फिल्मी गीतो का कार्यक्रम मधुकर गुंडलवार के नेतृत्व मे हुआ। जिसमे ‘ज्योती कलश झलके’ यह प्रार्थना गीत से गीत गायन की झलकिया प्रस्तुत की गयी। ‘चांद आहे भरेगा, रुह के फासले नही होते, ये समा समा है, ये प्यार का, गीत गाता हुं मैं, गाता रहे मेरा दिल, फुलो का तारो का सबका कहना है, नदिया से दरिया, तेरा मेरा साथ रहे, वादा करले साजना, ओ मेरे दिल के चैन’ सहित सदाबहार गीतों की प्रस्तुतियां कलाकारों ने दी।नंदिनी शिंदे, संगीता ढोणे, साची अवसरमोल, माया कांबळे, अरुणा कुंडे, शुभांगी, भोजराज तायडे, श्रीधर मानकर, राजू भार्गव, दिलीप मोरे, अंकुश मानकर, बाबुराव पवार एवं मधुकर गुंडलवार ने गीत प्रस्तुत का समा बांध दिया। महिला दिन के उपलक्षमे उपस्थित सभी महिलाओ का सत्कार किया गया । कार्यक्रम का सूत्र संचालन मधुकर गुंडलवार ने किया।
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