डॉ. प्रभु प्रेरणा के स्रोत -डॉ. शर्मा
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नागपुर। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के तत्वावधान में 23 वर्ष पूर्ण होने पर 375वीं आभासी गोष्ठी आयोजित हुई जिसका विषय 'राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना की व्याप्ति और डॉ. प्रभु चौधरी की भूमिका 'इस गोष्ठी में अपना मंतव्य देते हुए डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, कुलानुशासक एवं हिंदी विभागाध्यक्ष विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना अध्यक्ष ने कहा -प्रभु चौधरी का व्यक्तित्व दूरदर्शिता, अनुकूल शीलता, स्पष्टवादिता' त्वरित निर्णय क्षमता एवं संवेदनशीलता आदि गुणों से संपन्न रहा।
डॉ. शहनाज़ शेख, सचिव राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, महाराष्ट्र ने कहा- संस्था में किसी का कोई भी पद हो सभी कार्य स्वयं की जिम्मेदारी से करके कार्यक्रम को सफल बनाते थे प्रभुजी।
भूतपूर्व शिक्षा अधिकारी, संरक्षक राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना श्री बी के शर्मा जी ने कहा - डॉ .प्रभु चौधरी में एक अद्भुत संगठन की क्षमता थी।
डॉ. हरि सिंह पाल, महामंत्री नागरी लिपि परिषद् ने कहा- डॉ. प्रभु चौधरी के नाम से एक पुरस्कार होना चाहिए और उनके कार्यों को पुनर्जागरण करना चाहिए।
डॉ .प्रतिभा येरेकर, हिंदी विभागाध्यक्ष ने कहा, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए।
श्री हरेराम बाजपेई, मार्गदर्शक राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने कहा-उत्सव मनाने का कार्य बहुत अच्छे से करते थे।
डॉ .हरीष कुमार सिंह, राष्ट्रीय मार्गदर्शक,मध्य प्रदेश ने कहा- प्रभु हमारे बचपन के मित्र हैं।
डॉ.अरुणा सर्राफ, मध्य प्रदेश इकाई राष्ट्रीय संयोजक ने कहा - प्रभुजी ने हमें बोलना सिखाया।
डॉ.मुक्त कान्हा कौशिक, संयोजक छत्तीसगढ़ ने कहा - प्रभुजी को सूत्रधार कहती थी मैं।
मुमताज ने कहा -पिता की तरह थे मेरे लिए।
पदमचंद गांधी संयोजक ने कहा-हर क्षेत्र के विषयों पर आधारित कार्यक्रम करवाते थे।
डॉ.रश्मि चौबे, गाजियाबाद, राष्ट्रीय प्रवक्ता राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने कार्यक्रम का सुव्यवस्थित संचालन किया। संचालन में राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना एवं प्रभु जी की कार्य शैली पर विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ.रश्मि चौबे, गाजियाबाद की सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम में डॉ. प्रभु चौधरी के सुपुत्र श्री जीतेन्द्र चौधरी के साथ अन्य अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

