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सांप्रदायिक सौहाद्र हेतु संविधान ही सक्षम : एस एन विनोद

नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के सभा कक्ष में वरिष्ठ पत्रकार संपादक एस एन विनोद ने  सांप्रदायिक सौहाद्र विषय पर मत रखते हुए कहा ,आज समाज विघटन के कगार पर खड़ा है। राज दल और मीडिया अपनी कुत्सित मानसिकता में सांप्रदायिकता का जहर मिला खतरनाक साजिश में शामिल हैं। आज हमारा वैश्विक संविधान ही सर्वधर्म समभाव की रक्षा कर सकता है। उसे संजोएं।

वरिष्ठ अधिवक्ता ओ. डी. जैन ने आचार्य  रामचंद्र शुक्ल के कथन को रखकर समझाया , आत्मा की पवित्रता ही समृद्धि ला सकती है । ईसा मसीह को भी सौहार्द की रक्षा हेतु सलीम पर चढ़ना पड़ा था। सभी धर्म अच्छे हैं बस उनके मानवीय भावना समझ वाणी में शांति लाना आवश्यक है। संपादक नीरज श्रीवास्तव ने वसुदेव कुटुंबकम की भावना का उल्लेख कर प्रश्न उठाया, क्या उदारता सहिष्णुता किसी एक संप्रदाय की ही धरोहर है ? क्या कुप्रथाओं और आतंकवाद सौहाद्र की भावना का अंत नहीं करता? वरिष्ठ साहित्यकार , पत्रकार पूर्णिमा पाटिल ने नैतिक शिक्षा के माध्यम से मानवतावाद के सिद्धांत, समावेशी भावना की व्यापक दृष्टि पर मत व्यक्त कर, विदेशों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से सांप्रदायिक सौहार्द के उदाहरण प्रस्तुत किए।

पत्रकार संपादक डॉ कृष्ण नागपाल ने कहा आज सद्भावना की भावना स्थापित करने के प्रयत्न ही नहीं हो रहे हैं। आज जातिवाद की नई सांप्रदायिक भावना लेकर उठ खड़ा हो रहा है। वरिष्ठ भाषा अधिकारी डॉ. अनिल त्रिपाठी ने यू जी सी 26 के खुलासा कर कहा शिक्षार्थी की कोई जात नहीं होती। सभी धर्म का आदर करें, विभाजन की खाई ना बढ़ाएं, क्योंकि ताली दोनों हाथ से ही बजती है। वरिष्ठ कथाकार नरेंद्र परिहार ने मानवता के क्रमिक विकास के साथ धर्म के पादुर्भाव ने सांप्रदायिक सद्भाव को बिगड़ा है। हमें पहले अपने मन की भावना को नियंत्रित कर ,मानवतावादी दृष्टिकोण के साथ उदारवादी भावना को केंद्र में रख सामूहिक विकास के प्रति समर्पित होना ही सच्चा सांप्रदायिक सद्भाव है।

कार्यक्रम की प्रस्तावना और आभार नागपुर वैचारिक मंच के सह संयोजक परिहार ने रखा । अगला विषय 'महिला आरक्षण विमर्श' पर चर्चा के लिए तय हुआ।

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