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इष्टदेव झूलेलाल की आराधना करे सिंधी समाज : साईं लालदास


भक्तों को नामदान की दीक्षा भी दी 

नागपुर। म. गांधी स्कूल की अंतिम लाइन, जरीपटका स्थित झूलेलाल मंदिर में सद्गुरु साईं लालदास साहिब का आगमन हुआ. प्रवचनों में उन्होंने कहा कि 10वीं शताब्दी में जब सिंध प्रांत में क्रूर बादशाह मिर्ख के हिन्दुओं पर अत्याचार चरम सीमा पर पहुंच गए, जलाधिपति वरुणदेव ने भक्तों की करुण पुकार सुनकर धर्म की रक्षार्थ झूलेलाल के रूप में मनुष्य योनि में अवतार लेकर उसे सबक सिखाया. 

अतः सभी सिंधियों को इष्टदेव की आराधना करनी चाहिए. बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने साईं लालदास से नामदान की दीक्षा भी ली. मंदिर प्रमुख महेश आनंदानी व भूषण परियानी के अनुसार उन्होंने लोगों की समस्याओं का निराकरण भी किया. मंदिर परिसर में निर्मित कृत्रिम जलाशय में भक्तजनों ने ज्योति प्रज्वलित की. 

सफलतार्थ श्याम रामचंदानी, दिलीप सहजरामानी, श्रीचंद केवलरामानी, पवन लालवानी, महेश वाधवानी, सूरज छबलानी, जयराम देवानी, हीरालाल वासवानी, दिलीप माखीजानी, दर्शन चावला सहित मंडल के सभी सेवादारों ने प्रयास किए.
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