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छत्तीसगढ़ विकास की नित नई सीढ़ियां बढ़ते हुए प्रगति की राह पर अग्रसर : डॉ.विजयालक्ष्मी रामटेके

                          

नागपुर। विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज, छत्तीसगढ़ इकाई के द्वारा छत्तीसगढ़ के विकास में आधुनिक प्रौद्योगिकी का महत्व विषय पर राष्ट्रीय आभासी संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता डॉ. विजयलक्ष्मी रामटेके, अधिष्ठाता, अध्यक्ष विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान, प्रयागराज अपने अध्यक्षीय की उद्बोधन में कहां कि छत्तीसगढ़ भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है इसका गठन 1 नवम्बर 2000 को हुआ पहले यह मध्यप्रदेश के अंतर्गत था। छत्तीसगढ़ के गर्भ में प्राकृतिक संसाधनों का खजाना है और यहां के इतिहास के गर्भ में दिलचस्प जानकारियों का भंडार है। 

नई औद्योगिक नीति में टेक्सटाइल, कृषि एवं खाद्य, कंप्रेस्ड बायो गैस,ग्रीन हायड्रोजन, इलेक्ट्रिकल एन्ड इलेक्ट्रॉनिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स एंड कंप्यूटिंग,डेटा सेंटर, जल विद्युत परियोजना, सौर ऊर्जा परियोजना इत्यादि के लिए निवेश को प्रोत्साहन का प्रावधान है।छत्तीसगढ़ ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में डिजिटल समावेश सुनिश्चित करते हुए विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है, छत्तीसगढ़ विकास की नित नई सीढियां चढ़ते हुए प्रगति की राह पर अग्रसर है। 

वक्ता के रूप में उपस्थित श्री बलदाऊ राम साहू, सचिव सेवानिवृत्ति छत्तीसगढ़ राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग रायपुर उसने कहा कि आई का महत्व बताते हुए कहा कि आजकल एआई के द्वारा व्यक्ति अपने कार्य को आसान बना लेता है यही छत्तीसगढ़ में हो रहा है छत्तीसगढ़ में किसानों को स्मार्ट तकनीकी का उपयोग कर रहे हैं और बीज बोने से लेकर फसल कटाई तक कृषि उपज में वृद्धि हो रही है। आधुनिक मशीनों का उपयोग बढ़ रहा है। 

अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी, सचिव, विश्व हिंदी साहित्य सेवा संस्थान प्रयागराज ने कहा कि छत्तीसगढ़ विकास पर आधुनिक प्रौद्योगिकी का प्रभाव तेजी से देखने मिल रहा है। और छत्तीसगढ़ काफी विकसित हो चुका है।वक्ता के रूप में उपस्थित डॉ. किरण बाला पटेल, प्रतिष्ठित शिक्षाविद, शोधकर्ता एवं प्रशासनिक विशेषज्ञने कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी में छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसमें कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासन सभी क्षेत्र में प्रगति हुई है भविष्य में तकनीक का सही उपयोग राज्य को और अधिक विकसित एवं आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा। 

प्रस्तावित उद्बोधन में डॉ.मुक्ता कान्हा कौशिक, छत्तीसगढ़ प्रभारी ने कहा किआधुनिक प्रौद्योगिकी छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित और औद्योगिक परिदृश्य को तेजी से बदल रही है। यह न केवल आर्थिक विकास को गति दे रही है बल्कि राज्य को आत्मनिर्भर विकास की ओर ले जा रही हैं। कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ. अवंतिका शर्मा, व्याख्याता राजनांदगांव के सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत  डॉ. सरस्वती वर्मा, कार्यकारी प्रभारी छत्तीसगढ़ के द्वारा किया गया। आभार डॉ. नम्रता ध्रुव के द्वारा किया गया। आभासी पटल पर डॉ.भरत शेणकर, डॉ. रतिराम गढेवाल, डॉ. नीरजा चौबे रायपुर सहित अनेक साहित्यकार शिक्षा विद् की उपस्थिति रही।
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