मां पर कविता सुनकर आंखों में छलके आंसू
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विद्योतमा फाऊंडेशन नागपुर ईकाई का ऑनलाइन काव्य पाठ में बंधा समां
नागपुर/रायबरेली। विद्योतमा फाउंडेशन नागपुर इकाई द्वारा ऑनलाइन काव्य पाठ का आयोजन किया गया। इसमें देश के अलग-अलग प्रांतों से जुड़े कवियों ने काव्य रस की वर्षा की। अध्यक्षता जनपद सीतापुर के डॉ रामकुमार रसिक ने की। कविता पाठ का आरंभ वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शीला भार्गव ने अपनी सागर कविता से किया। मुंबई से सत्यभामा, इंदौर से डॉ इंदू जैन ने कविता व डॉ निशी मंजवानी ने पूरब-पश्चिम आधारित गीत से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। वरिष्ठ साहित्यकार प्रभा मेहता ने मां पर रचना सुनकर उपस्थित साहित्यकारों की आंखों से आंसू निकल पड़े। रंजना श्रीवास्तव ने अपनी कविता से सभी को बांधे रखा।
वरिष्ठ कवि सुधा राठौड़ ने बढ़ती गर्मी पर आंचलिक भाषा में सुनाकर मन खुश कर दिया। रति चौबे ने सुरीली आवाज में गीत प्रस्तुत किया। साहित्यकार मधुलता व्यास ने अपनी कविता से सराहना बटोरी। ग्वालियर के हास्य कवि महेन्द्र भट्ट ने मेनका पर अपनी व्यंग्य कविता सुनाई , डॉ सुरेखा खरे सिध्दि , चंद्रकला भरतिया ने सुंदर कविता प्रस्तुत कर समां बांध दिया। कार्यक्रम का आरंभ मीरा जोगळेकर द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। विद्योतमा फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध मिश्रा ने संस्था का परिचय सबके समक्ष रखा। कवयित्री रागिनी बाजपेई ने बेटी पर कविता सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ राम कुमार रसिक ने साहित्यकारों की भूरी भूरी प्रशंसा करनी व अपनी एक ग़ज़ल सुनाई। संचालन नागपुर इकाई की अध्यक्ष पूनम मिश्रा 'पूर्णिमा' एवं डॉ सुरेखा खरे सिध्दि ने आभार व्यक्त किया ।
आचार्य द्विवेदी ने तय किए थे कविता के मानक : गौरव
विशेष अतिथि के रूप में रायबरेली के वरिष्ठ पत्रकार गौरव अवस्थी ने अपने संबोधन में पत्रकार गौरव अवस्थी ने प्रसिद्ध साहित्यकारों के साहित्य का विवेचन किया व आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के साहित्य पर चर्चा की। उन्होने कहा कि आचार्य द्विवेदी द्वारा खड़ीबोली आंदोलन के दौरान कवि और कविता के लिए तय किए गए मानकों पर चर्चा की। उन्होने कहा कि आचार्य द्विवेदी ने कवि शीर्षक से 1903 में पहला निबंध लिखकर तत्कालीन कवियों का मार्गदर्शन किया। इसके बाद कवि और कविता, कवि का कर्तव्य नाम से भी निबंध लिखे।


