पर्यावरण का संतुलन बिगड़ने से नागरिक परेशान : श्याम चौधरी
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वृक्षों की कटाई, सीमेंट सड़कों का बढ़ता जाल और बदलते वातावरण के लिए जनप्रतिनिधि जिम्मेदार
नागपुर। शहर सहित पूरे राज्य में लगातार बढ़ते तापमान, गर्मी की लहरों, अनियमित वर्षा और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण आम नागरिकों का जीवन प्रभावित हो रहा है। शहरों में लगातार हो रही वृक्षों की कटाई, सीमेंट-कंक्रीट सड़कों का विस्तार, खुली जगहों की कमी तथा अव्यवस्थित शहरीकरण के कारण वातावरण में बड़ा बदलाव हो रहा है, जिसका गंभीर प्रभाव नागरिकों पर पड़ रहा है।
पहले शहरों में बड़ी संख्या में पेड़, बगीचे और खुली जमीन होने के कारण वातावरण संतुलित रहता था। लेकिन आज विकास के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की जा रही है। सीमेंट की सड़कें, इमारतें और कंक्रीट के बढ़ते जंगल के कारण गर्मी अधिक मात्रा में जमा होती है। इससे शहर का तापमान लगातार बढ़ रहा है और नागरिकों को भीषण गर्मी, स्वास्थ्य समस्याओं तथा प्रदूषण का सामना करना पड़ रहा है।
विशेष रूप से छोटे बच्चे, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग को बढ़ती गर्मी का सबसे अधिक कष्ट झेलना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में पानी की कमी उत्पन्न हो रही है तथा पर्यावरणीय असंतुलन के कारण भविष्य में स्थिति और गंभीर होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
इस संबंध में गंभीर चिंता व्यक्त की जा रही है। विकास कार्य करते समय पर्यावरण का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई हो रही है, लेकिन उसके बदले पर्याप्त वृक्षारोपण नहीं किया जा रहा। शहरों में सीमेंट सड़कों का जाल बिछाया गया, लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस उपाय नहीं किए गए। ऐसी स्थिति में उत्पन्न परिस्थितियों के लिए संबंधित प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार क्यों न ठहराया जाए, ऐसा सवाल अब नागरिक उठा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि शहर में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, जलसंवर्धन, खुली जगहों का संरक्षण तथा पर्यावरण अनुकूल विकास नीति लागू करने की आवश्यकता है। केवल विकास कार्यों की घोषणाएं करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य और भविष्य के पर्यावरण को ध्यान में रखकर निर्णय लेना आवश्यक है।
नागरिकों से भी पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आकर वृक्षारोपण, पानी की बचत तथा प्रदूषण नियंत्रण में योगदान देने की सामाजिक कार्यकर्ता श्याम चौधरी ने अपील की है।
