अनुसूचित जनजातियों के उत्थान के प्रति सदा समर्पित रहूंगी : सांसद मायाताई इवनाते
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नागपुर। 'राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्य करते हुए मैं सभी के साथ- साथ अनुसूचित जनजातियों (एस.टी. कम्युनिटी) के उत्थान के प्रति पूरी तरह समर्पित रहूंगी'। ये उद्गार थे हाल ही में राज्यसभा सदस्य के रूप में नियुक्त मायाताई इवनाते के जो उन्होंने विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन के कार्यक्रम 'संवाद' में साहित्यकार डॉ. सागर खादीवाला से खुलकर बात करते हुए व्यक्त किये। एक छोटे से गांव के अत्यंत गरीब परिवार में जन्म लेने से लेकर नगरसेवक, महापौर और फिर राज्यसभा सदस्य बनने तक की अपनी दिलचस्प जीवन- यात्रा के दौरान आए कठिन अनुभवों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने आदिवासी समुदाय की कठिनाइयों और संघर्षपूर्ण जीवन का यथार्थ चित्रण प्रस्तुत किया।
राजनीति में अपने अनायास प्रवेश के संबंध में रोचक तथ्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया की सन् 2002 में महानगरपालिका के चुनाव के समय उनका चुनाव क्षेत्र एस.टी. महिला के लिए आरक्षित किया गया था। वे साधारण गृहिणी के समान जीवन जी रही थी। राजनीति में प्रवेश का श्रेय अपनी सास तथा वर्तमान में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को देते हुए बताया की इन दोनों ने उनके पति को इस बात के लिए तैयार किया कि उन्हें चुनाव लड़ाया जाए। उनकी सास ने अपनी बहू को ज़िम्मेदारियों के बोझ से मुक्त करने के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली। यह कहते हुए वे भावुक हो गईं कि मैंने विभिन्न पदों पर कार्य किया पर मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं पार्लियामेंट में पहुँचूगी। संसद की सीढ़ियों पर कदम रखते हुए मेरी ऑंखों से आँसू झर रहे थे। श्रोताओं के प्रश्नों और जिज्ञासाओं का भी उन्होंने बखूबी समाधान किया। भारी संख्या में उपस्थित विभिन्न क्षेत्रों के श्रोताओं से पूरा सभागृह भरा हुआ था।
