हिंदी और भारतीय भाषाओं का आधार हैं डेढ़ हजार से अधिक बोलियां : डॉ. शैलेंद्रकुमार शर्मा
विश्व लिपि बनेगी नागरी लिपि : डॉ. हरिसिंह पाल
देवनागरी के समक्ष मौजूद रोमन लिपि की चुनौती को लेकर जागरूकता आवश्यक : हरेराम बाजपेयी
राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिंदी और नागरी लिपि पर हुआ विमर्श
नागपुर/उज्जैन। देश की जानी- मानी संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना उज्जैन के तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। संगोष्ठी का विषय वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदी एवं नागरी लिपि था। मुख्य वक्ता के रूप में अपना मंतव्य देते हुए डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, कुलानुशासक एवं विभागाध्यक्ष, हिंदी विभाग, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन ने कहा — हिंदी और भारतीय भाषाओं का आधार भारत में बोली जाने वाली डेढ़ हजार से अधिक भाषाएँ और बोलियाँ हैं। कोई भी भाषा तब तक भाषा नहीं बनती जब तक उसका बोलियों के साथ संबंध नहीं बनता। जनपदीय भाषाएँ राष्ट्रभाषा हिंदी की शिराओं में संचार करती हैं। हिंदी का भविष्य जनपदीय भाषाओं और देवनागरी लिपि के सशक्त आधार पर ही निर्मित होगा।
डॉ. हरिसिंह पाल, महामंत्री, नागरी लिपि परिषद्, नई दिल्ली ने कहा कि शैक्षिक संस्थानों और भारत सरकार के प्रयासों से हिंदी दिवस, हिंदी पखवाड़ा और हिंदी माह जैसे आयोजन अब नियमित रूप से होते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि नागरी लिपि विश्व लिपि बनेगी और हिंदी भाषा संयुक्त राष्ट्र संघ की भाषा बनेगी।
श्री हरेराम वाजपेयी, प्रचार मंत्री, मध्य भारत हिंदी समिति एवं संस्थापक हिंदी परिवार इंदौर ने कहा कि 1942 की वीणा पत्रिका में रोमन लिपि के विस्तार पर चिंता व्यक्त की गई थी, जो आज भी प्रासंगिक है। उन्होंने कविता भी सुनाई।
इस अवसर पर डॉ हरिसिंह पाल, नई दिल्ली और हरेराम वाजपेयी,इंदौर के जन्मदिवस के अवसर पर उन का सारस्वत सम्मान किया गया।
डॉ. बी. के. शर्मा, संरक्षक राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना ने कहा कि तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत की नई पीढ़ी को भी हिंदी पढ़ने की व्यवस्था होनी चाहिए। डॉ. शहनाज शेख, राष्ट्रीय सचिव, महाराष्ट्र ने कहा कि तकनीकी और डिजिटल युग में भी देवनागरी लिपि खरी उतरती है। श्रीमती सुवर्णा जाधव, राष्ट्रीय संयोजक, पुणे ने भाषा की शुद्धता पर बल दिया। डॉ. रणजीत सिंह अरोड़ा पुणे ने देवनागरी को वैज्ञानिक लिपि बताया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रश्मि चौबे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, गाजियाबाद ने किया। सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। स्वागत भाषण डॉ. श्वेता मिश्रा ने दिया, प्रस्तावना डॉ. शहनाज शेख ने प्रस्तुत की और आभार डॉ. रश्मि चौबे ने व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. अरुणा सराफ, प्रतिभा येरेकर, महाराष्ट्र, डॉ. गोकुलेश्वर द्विवेदी, प्रयागराज, डॉ. बाबला गरेहवाल, डॉ रजिया शेख, डॉ मुमताज पठान, महाराष्ट्र डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक, रायपुर डॉ. झरेंद्र, सोनू कुमार पटना सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।