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अंदर की उमंग को झर-झर बहते रखना सृजनशील मन की जरूरत है : मीनल येवले

सुचित्रा कातरकर के 'पाऊस-काही संदर्भ' का प्रकाशन

नागपुर। अपनी अंदर की उमंग को झर-झर बहते रखना सृजनशील मन की जरूरत होती है। जब अंदर के झरने उमड़ने लगते हैं तो वे कभी-कभी किनारों से भी विद्रोह करने लगते हैं। बहना ही उनका मूल धर्म होता है।" ऐसा प्रतिपादन वरिष्ठ कवयित्री मीनल येवले ने किया।  

वे लेखिका कवयित्री सुचित्रा कातरकर की 'पाऊस.. काही संदर्भ' पुस्तक के प्रकाशन समारोह में बोल रही थीं। प्रकाशन समारोह दिनांक 10 जुलाई को सायंटिफिक सभागृह में संपन्न हुआ।

पाऊस इस एक विषय के इर्द-गिर्द कवयित्री एवं ललित लेखिका सुचित्रा कातरकर का लेखन ऐसे ही चक्कर काटते हुए नाचने लगता है। पाऊस.. काही संदर्भ यह पुस्तक ही एक अलग प्रयोग है। ललित, कविता और हाइकू ये तीन साहित्य प्रकार एक ही जगह हाथ में हाथ डालकर एक-दूसरे को जगह देते हुए पंक्तिबद्ध इस पुस्तक में बैठे हैं। रचनाबंध अलग-अलग होने के बावजूद लेखन का मूल विषय एक ही है और वह है पाऊस। पुस्तक पर भाष्य करते हुए मीनल येवले ने यह भी कहा।

वरिष्ठ कवयित्री सुचित्रा कातरकर की 'पाऊस काही संदर्भ' का प्रकाशन सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सुवर्णरेखा पाटील के हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर मंच पर स्वरसाधना अध्यक्ष श्याम देशपांडे, पुस्तक की समीक्षा करने वाले साहित्यिक प्रदत्त उर्फ प्रभाकर तांडेकर, लोकतंत्र सेनानी संघ अध्यक्ष बिंदुमाधव देव, ज्येष्ठ नागरिक महामंडळ विदर्भ के अध्यक्ष डॉ. अविनाश तेलंग एवं ज्ञानपथ पब्लिकेशन के प्रकाशक सचिन सुकळकर उपस्थित थे।  

सचिन सुकळकर ने लेखिका कवयित्री सुचित्रा कातरकर का सत्कार किया। प्रकाशक द्वारा लेखिका का किया गया सत्कार एक अलग और सुखद एवं आशादायी दृश्य था। सुव्यवस्थित सूत्रसंचालन प्रा. उज्ज्वला अंधारे ने किया। कार्यक्रम में अनेक दिग्गज साहित्यिक उपस्थित थे।

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