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धार्मिक संस्थाओं के वित्तीय व्यवहार में पारदर्शिता होना अत्यंत आवश्यक है : पं. धीरज दुबे

नागपुर। विदर्भ हिंदी साहित्य सम्मेलन हिंदी मोर भवन, सीताबर्डी, नागपुर में 'चौपाल' उपक्रम के अंतर्गत संयोजक विजय तिवारी व सह संयोजक हेमंत कुमार पांडे के नेतृत्व में दिनांक 13 जुलाई 2026 को "धार्मिक संस्थाओं के व्यवहार द्वारा जनता के आस्था और विश्वास पर होता है आघात" इस विषय पर चर्चा का आयोजन किया गया।  मुख्य अतिथि के रूप में पंडित धीरज दुबे उपस्थित थे।

चर्चा का प्रारंभ में माता सरस्वती की वंदना के साथ की गई। तत्पश्चात पद्मदेव दुबे व सुभाष उपाध्याय ने मुख्य अतिथि का अंग वस्त्र व सम्मानचिन्ह प्रदान कर सम्मान किया।

 चर्चा के आरंभ में मदनगोपाल बाजपेई जी ने अनेक संस्थाओं में चल रहे छोटे-मोटे गैरव्यवहार व आर्थिक हेरा फेरी के बारे में चर्चा की। उन्होंने अनेक मंदिरों में हो रहे गैरव्यवहारों का सचित्र उदाहरण दिया। श्रीमती माधुरी राऊलकर ने स्वरचित रचना के द्वारा धार्मिक संस्थाओं में चल रही गतिविधि के बारे में चर्चा की। सुभाष उपाध्याय ने अपने साहित्यिक अंदाज में कविता के माध्यम से धार्मिक संस्थाओं से जुड़े हुए लोगों के जीवन व व्यवहार पर हास्य चर्चा की।

डॉ. बच्चू पांडे ने जीवन में आए कटु अनुभव के साथ अपने विचार साझा किया। सह संयोजक हेमंत कुमार पांडे ने इतिहास में आक्रांताओं द्वारा किए गए आक्रमण, अनेक मंदिरों के धान की लूट व स्वतंत्रता के बाद शासन द्वारा मंदिर अधिग्रहण व उनके धन का दुरुपयोग के बारे में चर्चा करते हुए सामान्य मंदिरों में हो रही गैरव्यवहार घटनाओं की विस्तार से चर्चा की।

एड. जगत बाजपेई जी ने अनेक देशों के धार्मिक संस्थाओं के परिचालन के बारे में पारदर्शिता उनके साथ नियम व उनकी सफलता का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया। 

अंत में मुख्य अतिथि धीरज दुबे ने धार्मिक संस्थाओं में आर्थिक व्यवहार के संचालन में सुधार के सुझाव दिए। चर्चा के अंत में संयोजक विजय तिवारी ने आधार प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. कृष्ण कुमार द्विवेदी, आनंद मुले, अमरीश दुबे, डॉ. बालकृष्ण महाजन, संजय शर्मा, सचिन देवपुत्रे इन्होंने अपना अमूल्य योगदान दिया।

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