बाघ के शिकार की ऐतिहासिक ट्रॉफी को भावी पीढ़ियों के लिए किया संरक्षित
इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय, बालाघाट ने स्व. देवदत्त शर्मा की धरोहर को दिया सम्मान
नागपुर/बालाघाट। इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय, बालाघाट मध्यप्रदेश ने वन्यजीव संरक्षण, ऐतिहासिक धरोहरों के दस्तावेजीकरण और भावी पीढ़ियों तक इतिहास पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्वर्गीय देवदत्त शर्मा द्वारा शिकार किए गए बाघ की ट्रॉफी को ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित किया है।
संस्थान की ओर से जारी सम्मान-पत्र के अनुसार, स्व. देवदत्त शर्मा ने 12 फरवरी 1964 को एक बाघ का शिकार किया था। उस बाघ की ट्रॉफी का पंजीयन क्रमांक 4103100219 है। इस ऐतिहासिक वस्तु को 17 सितंबर 2026 को संस्थान संग्रहालय, बालाघाट में भावी पीढ़ियों के लिए धरोहर के रूप में संरक्षित किया गया।
इस महत्वपूर्ण योगदान के लिए स्व. देवदत्त शर्मा के पुत्र दीपक शर्मा, निवासी वार्ड क्रमांक 15, मेन रोड, बालाघाट को संस्थान ने सम्मानित करने का निर्णय लिया। संस्थान के संग्रहाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह गहरवार ने 15 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि के अवसर पर जारी सम्मान-पत्र के माध्यम से दीपक शर्मा को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
ऐतिहासिक वस्तुओं का संरक्षण अतीत की घटनाओं, तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों और समय के साथ बदलती मानवीय सोच को समझने का अवसर प्रदान करता है। इस प्रकार की धरोहरों का संग्रहालयों में दस्तावेजीकरण आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक संदर्भ सुरक्षित रखने में सहायक होता है।
इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय, बालाघाट की इस पहल से एक पुरानी स्मृति को संस्थागत संरक्षण मिला है। साथ ही, यह अवसर ऐतिहासिक धरोहरों के महत्व, उनके उचित दस्तावेजीकरण और संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने का संदेश भी देता है।
