नो स्कूल - नो फीस...
सविधान चौक पर पालको का धरना
नागपुर। जागृक पालक समिति, विदर्भ पेरेंट्स एसोसिएशन, जय जवान जय किसान संघटना, आम आदमी पार्टी, विदर्भ राज्य आघाडी, लोकभारती, जागृक पालक परिषद् व लोकजागृती मोर्चा के सयुंक्त तत्वदान में रविवार 7 फरवरी को दोपहर 12 बजे से संविधान चौक पर स्कूलों की मनमानी के खिलाफ विशाल धरना आंदोलन का आयोजन किया गया है।
विदर्भ पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने कहा की पिछले छह महीने से लगातार नो स्कूल नो फीस का आंदोलन प्रदेश में चल रहा है परतुं न स्कूल और न सरकार पालको की जायज मांगो पर उन्हें राहत देने के लिए कोई कदम उठा रही है लॉकडाउन के दौरान छात्रों की ३ माह की फीस माफ़ की जाये तथा शैक्षणिक वर्ष 2020 - 2021 की स्कूलों की फीस में 50 प्रतिशत छूट दी जाए। देश बहुत कठिन परिस्तिथि से गुजर रहा है।
कोविड - 19 ने सभी की आर्थिक रूप से कमर तोड़ दी है।लॉकडाउन के चलते देश के सभी परिवार आर्थिक नुकसान का सामना कर रहे है। इस दौरान अपने आप को और परिवार को इस महामारी से बचाने में हर नागरिक जदोजहद कर रहा है। तक़रीबन प्रदेश की सभी स्कूले 10 मार्च से बंद पड़ी है और छात्र अपने घर पर ही पढ़ने के लिए मजबूर है।
कई स्कूलों में परीक्षाएं भी नहीं हो पायी है अतः इस वर्ष मार्च से मई की फीस माफ़ की जाना आज की आवश्यकता है जिन पालको ने इन माह की फीस पहले ही भरदी थी उन्हें उसका क्रेडिट दिया जाए और वर्ष 2020 - 2021 में उतना पैसा कम किया जाए। हाल ही में ऐसा देखने में आया है की कई CBSE स्कूलों ने फीस की मांग चालू कर दी है जो पूरी तरह मानवता के खिलाफ व गैरवाजिब है स्कूल संचालको को शर्म आनी चाहिए की प्रति वर्ष फीस के करोडो रुपये डकारने के बाद भी इस तरह के संकट काल में गैर जवाबदारी बर्ताव कर रहे है रहा है.
महाराष्ट्र सरकार ने शिक्षा राज्यमंत्री मा बच्चू कडु ने नागपुर की 15 स्कूलों का सरकारी ऑडिट करने का आदेश दिया है जिसमे यह बात सामने आयी है की इन २ वर्षो में इन स्कूलों ने तक़रीबन 100 करोड़ की गैर क़ानूनी वसूली पालको से की है हमारी मांग है की यह ऑडिट वर्ष 2011 से 2021 तक का किया जाये क्युकी महाराष्ट्र में फीस एक्ट 2011 से लागु हुवा था।
उक्त सभी मांगो को लेकर विशाल धरना का आयोजन किया गया है अतः सभी पालको से निवेदन है की चाहे उनका बच्चा किसी भी स्कूल में पढ़ता हो सभी पालक बढ़ी संख्या में इस धरने में शामिल हो ताकि गूंगा बहेरा प्रशासन तक उनकी बात पोहच सके ऐसी मांग सभी पालक संघटनाओ ने की है।
